गुरु चालीसा
गुरु चालीसा देवगुरु बृहस्पति को समर्पित 40 चौपाइयों का स्तोत्र है। गुरुवार, गुरु महादशा या कमजोर गुरु में पाठ करने से वैदिक ज्योतिष में ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता है।

दोहा
प्रन्वाऊ प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान गुन खान। श्री गणेश शारद सहित, बसों ह्रदय में आन।
Pranvaoo Pratham Guru Charan, Buddhi Gyan Gun Khan | Shri Ganesh Sharad Sahit, Bason Hriday Mein Aan ||
प्रथम गुरु चरण प्रणाम, बुद्धि-ज्ञान-गुण खान; श्री गणेश-शारदा सहित हृदय में आन बसें।
दोहा
अज्ञानी मति मंद मैं, हैं गुरुस्वामी सुजान। दोषों से मैं भरा हुआ हूँ, तुम हो कृपा निधान।
Agyani Mati Mand Main, Hain Gurusvami Sujan | Doshon Se Main Bhara Hua Hoon, Tum Ho Kripa Nidhan ||
अज्ञानी मति मंद मैं, गुरुस्वामी सुजान हैं; दोषों से भरा हूँ, तुम कृपा निधान हो।
चौपाई 1
जय नारायण जय निखिलेश्वर । विश्व प्रसिद्ध अखिल तंत्रेश्वर ।।
Jai Narayan Jai Nikhileshvar | Vishv Prasiddh Akhil Tantreshvar ||
जय नारायण, जय निखिलेश्वर; विश्व प्रसिद्ध अखिल तंत्रेश्वर।
चौपाई 2
यंत्र मंत्र विज्ञानं के ज्ञाता । भारत भू के प्रेम प्रेनता ।।
Yantra Mantra Vigyanan Ke Gyata | Bharat Bhoo Ke Prem Prenata ||
यंत्र-मंत्र-विज्ञान के ज्ञाता; भारत भू के प्रेम प्रेरक।
चौपाई 3
जब जब हुई धरम की हानि । सिद्धाश्रम ने पठए ज्ञानी ।।
Jab Jab Hui Dharam Ki Hani | Siddhashram Ne Pathe Gyani ||
जब-जब धर्म की हानि हुई, सिद्धाश्रम ने ज्ञानी पठाए।
चौपाई 4
सच्चिदानंद गुरु के प्यारे । सिद्धाश्रम से आप पधारे ।।
Sachchidanand Guru Ke Pyare | Siddhashram Se Aap Padhare ||
सच्चिदानंद गुरु के प्यारे, सिद्धाश्रम से आप पधारे।
चौपाई 5
उच्चकोटि के ऋषि मुनि स्वेच्छा । ओय करन धरम की रक्षा ।।
Uchchakoti Ke Rishi Muni Svechchha | Oy Karan Dharam Ki Raksha ||
उच्चकोटि के ऋषि-मुनि स्वेच्छा से धर्म की रक्षा करने आए।
चौपाई 6
अबकी बार आपकी बारी । त्राहि त्राहि है धरा पुकारी ।।
Abaki Bar Aapki Bari | Trahi Trahi Hai Dhara Pukari ||
अबकी बार आपकी बारी; धरा पुकारती है — त्राहि त्राहि।
चौपाई 7
मरुन्धर प्रान्त खरंटिया ग्रामा । मुल्तानचंद पिता कर नामा ।।
Marundhar Prant Kharantiya Grama | Multanachand Pita Kar Nama ||
मरुन्धर प्रांत खरंटिया ग्राम; पिता का नाम मुल्तानचंद।
चौपाई 8
शेषशायी सपने में आये । माता को दर्शन दिखलाये ।।
Sheshashayi Sapane Mein Aaye | Mata Ko Darshan Dikhalaye ||
शेषशायी सपने में आए; माता को दर्शन दिखलाए।
चौपाई 9
रुपादेवि मातु अति धार्मिक । जनम भयो शुभ इक्कीस तारीख ।।
Rupadevi Matu Ati Dharmik | Janam Bhayo Shubh Ikkis Tarikh ||
रुपादेवी मातु अति धार्मिक; शुभ इक्कीस तारीख को जन्म।
चौपाई 10
जन्म दिवस तिथि शुभ साधक की । पूजा करते आराधक की ।।
Janm Divas Tithi Shubh Sadhak Ki | Pooja Karate Aradhak Ki ||
जन्म दिवस-तिथि साधक के लिए शुभ; आराधक पूजा करते हैं।
चौपाई 11
जन्म वृतन्त सुनाये नवीना । मंत्र नारायण नाम करि दीना ।।
Janm Vritant Sunaye Navina | Mantr Narayan Nam Kari Deena ||
जन्म वृतंत सुनाए नवीन; नारायण नाम मंत्र दिया।
चौपाई 12
नाम नारायण भव भय हारी । सिद्ध योगी मानव तन धारी ।।
Nam Narayan Bhav Bhay Hari | Siddh Yogi Manav Tan Dhari ||
नाम नारायण भव भय हारी; सिद्ध योगी मानव तन धारी।
चौपाई 13
ऋषिवर ब्रह्म तत्व से ऊर्जित । आत्म स्वरुप गुरु गोरवान्वित ।।
Rshivar Brahm Tatv Se Urjit | Atm Svarup Guru Goravanvit ||
ऋषिवर ब्रह्म तत्व से ऊर्जित; आत्म स्वरूप, गुरु गोरवान्वित।
चौपाई 14
एक बार संग सखा भवन में । करि स्नान लगे चिन्तन में ।।
Ek Bar Sang Sakha Bhavan Mein | Kari Snan Lage Chintan Mein ||
एक बार सखा संग भवन में; स्नान कर चिंतन में लगे।
चौपाई 15
चिन्तन करत समाधि लागी । सुध बुध हीन भये अनुरागी ।।
Chintan Karat Samadhi Lagi | Sudh Budh Hin Bhaye Anuragi ||
चिंतन करते समाधि लगी; सुध-बुध हीन हो अनुरागी बने।
चौपाई 16
पूर्ण करि संसार की रीती । शंकर जैसे बने गृहस्थी ।।
Poorn Kari Sansar Ki Riti | Shankar Jaise Bane Grhasthi ||
संसार की रीति पूर्ण करि शंकर जैसे गृहस्थी बने।
चौपाई 17
अदभुत संगम प्रभु माया का । अवलोकन है विधि छाया का ।।
Adbhut Sangam Prabhu Maya Ka | Avalokan Hai Vidhi Chhaya Ka ||
अद्भुत संगम प्रभु माया का; विधि छाया का अवलोकन।
चौपाई 18
युग युग से भव बंधन रीती । जंहा नारायण वाही भगवती ।।
Yug Yug Se Bhav Bandhan Riti | Janha Narayan Vahi Bhagavati ||
युग-युग से भव बंधन रीति; जहाँ नारायण वही भगवती।
चौपाई 19
सांसारिक मन हुए अति ग्लानी । तब हिमगिरी गमन की ठानी ।।
Sansarik Man Hue Ati Glani | Tab Himagiri Gaman Ki Thani ||
सांसारिक मन अति ग्लानि हुआ; तब हिमगिरि गमन ठाना।
चौपाई 20
अठारह वर्ष हिमालय घूमे । सर्व सिद्धिया गुरु पग चूमें ।।
Atharah Varsh Himalay Ghoome | Sarv Siddhiya Guru Pag Choomen ||
अठारह वर्ष हिमालय घूमे; सर्व सिद्धियाँ गुरु पग चूमीं।
चौपाई 21
त्याग अटल सिद्धाश्रम आसन । करम भूमि आये नारायण ।।
Tyag Atal Siddhashram Asan | Karam Bhoomi Aaye Narayan ||
त्याग अटल, सिद्धाश्रम आसन; कर्म भूमि आए नारायण।
चौपाई 22
धरा गगन ब्रह्मण में गूंजी । जय गुरुदेव साधना पूंजी ।।
Dhara Gagan Brahman Mein Goonji | Jai Gurudev Sadhana Poonji ||
धरा-गगन ब्रह्मांड में गूंजी — जय गुरुदेव साधना पूंजी।
चौपाई 23
सर्व धर्महित शिविर पुरोधा । कर्मक्षेत्र के अतुलित योधा ।।
Sarv Dharmahit Shivir Purodha | Karmakshetr Ke Atulit Yodha ||
सर्व धर्महित शिविर पुरोधा; कर्मक्षेत्र के अतुलित योधा।
चौपाई 24
ह्रदय विशाल शास्त्र भण्डारा । भारत का भौतिक उजियारा ।।
Hriday Vishal Shastra Bhandara | Bharat Ka Bhautik Ujiyara ||
हृदय विशाल शास्त्र भण्डारा; भारत का भौतिक उजियारा।
चौपाई 25
एक सौ छप्पन ग्रन्थ रचयिता । सीधी साधक विश्व विजेता ।।
Ek Sau Chhappan Granth Rachayita | Sidhi Sadhak Vishv Vijeta ||
एक सौ छप्पन ग्रन्थ रचयिता; सीधी साधक, विश्व विजेता।
चौपाई 26
प्रिय लेखक प्रिय गूढ़ प्रवक्ता । भुत भविष्य के आप विधाता ।।
Priy Lekhak Priy Goodh Pravakta | Bhut Bhavishy Ke Ap Vidhata ||
प्रिय लेखक, प्रिय गूढ़ प्रवक्ता; भूत-भविष्य के विधाता।
चौपाई 27
आयुर्वेद ज्योतिष के सागर । षोडश कला युक्त परमेश्वर ।।
Ayurved Jyotish Ke Sagar | Shodash Kala Yukt Parameshvar ||
आयुर्वेद-ज्योतिष के सागर; षोडश कला युक्त परमेश्वर।
चौपाई 28
रतन पारखी विघन हरंता । सन्यासी अनन्यतम संता ।।
Ratan Parakhi Vighan Haranta | Sanyasi Ananyatam Santa ||
रतन पारखी, विघ्न हरंता; सन्यासी अनन्यतम संत।
चौपाई 29
अदभुत चमत्कार दिखलाया । पारद का शिवलिंग बनाया ।।
Adbhut Chamatkar Dikhalaya | Parad Ka Shivaling Banaya ||
अद्भुत चमत्कार दिखलाया; पारद का शिवलिंग बनाया।
चौपाई 30
वेद पुराण शास्त्र सब गाते । पारेश्वर दुर्लभ कहलाते ।।
Ved Puran Shastr Sab Gate | Pareshvar Durlabh Kahalate ||
वेद-पुराण-शास्त्र सब गाते; परेश्वर दुर्लभ कहलाते।
चौपाई 31
पूजा कर नित ध्यान लगावे । वो नर सिद्धाश्रम में जावे ।।
Pooja Kar Nit Dhyan Lagave | Vo Nar Siddhashram Mein Jave ||
नित पूजा-ध्यान करने वाला सिद्धाश्रम में जाता है।
चौपाई 32
चारो वेद कंठ में धारे । पूजनीय जन-जन के प्यारे ।।
Charo Ved Kanth Mein Dhare | Poojaniy Jan-Jan Ke Pyare ||
चारों वेद कंठ में धारे; जन-जन के पूजनीय प्यारे।
चौपाई 33
चिन्तन करत मंत्र जब गायें । विश्वामित्र वशिष्ठ बुलायें ।।
Chintan Karat Mantr Jab Gayen | Vishvamitr Vashishth Bulayen ||
चिंतन करते मंत्र गाएँ तो विश्वामित्र-वशिष्ठ बुलाएँ।
चौपाई 34
मंत्र नमो नारायण सांचा । ध्यानत भागत भुत-पिशाचा ।।
Mantra Namo Narayan Sancha | Dhyanat Bhagat Bhut-Pishacha ||
मंत्र नमो नारायण सांचा; ध्यानत भक्त भूत-पिशाच [भी वश में]।
चौपाई 35
प्रातः कल करहि निखिलायन । मन प्रसन्न नित तेजस्वी तन ।।
Pratah Kal Karahi Nikhilayan | Man Prasann Nit Tejasvi Tan ||
प्रातः काल सब नमन करें; मन प्रसन्न, नित तेजस्वी तन।
चौपाई 36
निर्मल मन से जो भी ध्यावे । रिद्धि सिद्धि सुख-सम्पति पावे ।।
Nirmal Man Se Jo Bhi Dhyave | Riddhi Siddhi Sukh-Sampatti Pave ||
निर्मल मन से ध्यावे सो ऋद्धि-सिद्धि-सुख-संपत्ति पावे।
चौपाई 37
पथ करही नित जो चालीसा । शांति प्रदान करहि योगिसा ।।
Path Karahi Nit Jo Chalisa | Shanti Pradan Karahi Yogisa ||
नित चालीसा पाठ करने वाले को योगीश्वर शांति प्रदान करते हैं।
चौपाई 38
अष्टोत्तर शत पाठ करत जो । सर्व सिद्धिया पावत जन सो ।।
Ashtottar Shat Path Karat Jo | Sarv Siddhiya Pavat Jan So ||
अष्टोत्तर शत पाठ करने वाला सर्व सिद्धियाँ पाता है।
चौपाई 39
श्री गुरु चरण की धारा । सिद्धाश्रम साधक परिवारा ।।
Shri Guru Charan Ki Dhara | Siddhashram Sadhak Parivara ||
श्री गुरु चरण की धारा; सिद्धाश्रम साधक परिवार।
चौपाई 40
जय जय जय आनंद के स्वामी । बारम्बार नमामी नमामी ।।
Jai Jai Jai Anand Ke Swami | Barambar Namami Namami ||
जय जय जय आनंद के स्वामी; बारम्बार नमामी नमामी।
दोहा
प्रन्वाऊ प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान गुन खान। श्री गणेश शारद सहित, बसों ह्रदय में आन।
Pranvaoo Pratham Guru Charan, Buddhi Gyan Gun Khan | Shri Ganesh Sharad Sahit, Bason Hriday Mein Aan ||
प्रथम गुरु चरण प्रणाम, बुद्धि-ज्ञान-गुण खान; श्री गणेश-शारदा सहित हृदय में आन बसें।
दोहा
अज्ञानी मति मंद मैं, हैं गुरुस्वामी सुजान। दोषों से मैं भरा हुआ हूँ, तुम हो कृपा निधान।
Agyani Mati Mand Main, Hain Gurusvami Sujan | Doshon Se Main Bhara Hua Hoon, Tum Ho Kripa Nidhan ||
अज्ञानी मति मंद मैं, गुरुस्वामी सुजान हैं; दोषों से भरा हूँ, तुम कृपा निधान हो।
गुरु चालीसा के बारे में
गुरु चालीसा हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो गुरु बृहस्पति को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
- गुरु ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को गुरु महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।
पाठ के लाभ
- कुंडली में कमजोर या पीड़ित गुरु को मजबूत करता है
- ज्ञान, शिक्षा, संतान और धार्मिक समृद्धि देता है
- गुरु दोष और विवाह-करियर की बाधाएँ दूर करता है
- गुरुवार को पीले पुष्प और चना दाल अर्पण के साथ पारंपरिक पाठ
शुभ समय और विधि
गुरुवार (गुरु का दिन) को प्रातः पाठ करें। पीले पुष्प, हल्दी, चना दाल अर्पित करें और घी का दीप जलाएँ। गुरु महादशा में नियमित गुरुवार पाठ विशेष शुभ है।
ज्योतिषीय महत्व
नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।