स्तोत्र और चालीसा पर वापस जाएं
स्तोत्रRahuRahu

राहु कवचम् (राहु स्तोत्रम्)

महाभारत द्रोण पर्व का सात श्लोकीय कवच — शरीर के प्रत्येक अंग को राहु की कृपा से सुरक्षित करता है। राहु महादशा, कालसर्प दोष और ग्रहण से जुड़े उपाय हेतु आवश्यक।

राहु कवचम् (राहु स्तोत्रम्)

चौपाई 1

प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिनम्। सैंहिकेयं करालास्यं लोकानामभयप्रदम्॥

Pranamami sada rahum shurpakaram kiritinam. Sainhikeyam karalasyam lokanamabhayapradam.

शूर्पाकार, किरीटी, सैंहिकेय, करालास्य, लोकानां अभयप्रद राहु को सदा प्रणाम।

चौपाई 2

नीलाम्बरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः। चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान्॥

Nilambarah shirah patu lalatam lokavanditah. Chakshushi patu me rahu shrotre tvardhashariravan.

नीलाम्बर शिरः, लोकवन्दित ललाट, राहु नेत्र, अर्धशरीर श्रोत्र की रक्षा करें।

चौपाई 3

नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम। जिह्वां मे सिंहिकासूनुः कण्ठं मे कठिनाङ्घ्रिकः॥

Nasikam me dhumravarnah shulapanirmukham mama. Jihvam me simhikasunuh kantham me kathinanghrikah.

धूम्रवर्ण नासिका, शूलपाणि मुख, सिंहिकासूनु जिह्वा, कठिनाङ्घ्रि कण्ठ की रक्षा।

चौपाई 4

भुजङ्गेशो भुजौ पातु नीलमाल्याम्बरः करौ। पातु वक्षःस्थलं मन्त्री पातु कुक्षिं विधुन्तुदः॥

Bhujangesho bhujau patu nilamalyambarah karau. Patu vakshahsthalam mantri patu kukshim vidhuntudah.

भुजंगेश भुज, नीलमाल्याम्बर कर, मन्त्री वक्षः, विधुन्तुद कुक्षि की रक्षा।

चौपाई 5

कटिं मे विकटः पातु ऊरू मे सुरपूजितः। स्वर्भानुर्जानुनी पातु जङ्घे मे पातु जाड्यहा॥

Katim me vikatah patu uru me surapujitah. Svarbhanurjanuni patu janghe me patu jadyaha.

विकट कटि, सुरपूजित ऊरु, स्वर्भानु जानु, जाड्यहा जङ्घा की रक्षा।

चौपाई 6

गुल्फौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः। सर्वाण्यङ्गानि मे पातु नीलचन्दनभूषणः॥

Gulphau grahapatih patu padau me bhishanakritih. Sarvanyangani me patu nilachandanabhushanah.

ग्रहपति गुल्फ, भीषणाकृति पाद, नीलचन्दनभूषण सर्वांग की रक्षा।

चौपाई 7

राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो भक्त्या पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन्। प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु- रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात्॥

Rahoridam kavachamriddhidavastudam yo bhaktya pathatyanudinam niyatah shuchih san. Prapnoti kirtimatulam shriyamriddhimayu- rarogyamatmavijayam cha hi tatprasadat.

जो भक्तिपूर्वक नियमित पवित्र होकर यह राहु कवच पढ़ता है, अतुल कीर्ति, श्री, ऋद्धि, आयु, आरोग्य और आत्मविजय पाता है।

राहु कवचम् के बारे में

राहु कवचम् हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो राहु को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

  • राहु ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को राहु महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।

पाठ के लाभ

  • राहु महादशा और अंतर्दशा से सुरक्षा
  • कालसर्प दोष और ग्रहण दोष का परंपरागत उपाय
  • भ्रम, आसक्ति और अचानक विघ्नों से रक्षा
  • फलश्रुति के अनुसार धन, कीर्ति, आरोग्य और विजय

शुभ समय और विधि

शनिवार शाम या राहु काल में सुरक्षा हेतु पढ़ें। राहु महादशा में प्रतिदिन सातों श्लोक। दक्षिण-पश्चिम मुख करें। शनिवार को नीले फूल और नारियल अर्पित करें।

ज्योतिषीय महत्व

नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।

संबंधित स्तोत्र और पाठ

स्तोत्रDurgaRahu

अर्गला स्तोत्रम्

देवी महात्म्य का अर्गला स्तोत्र (रूपं देहि जयं देहि) — दुर्गा सप्तशती पाठ का अंग। नवरात्रि में देवी कवच के बाद पढ़ा जाता है; राहु और भय से रक्षा हेतु शक्तिशाली।

पाठ करें
स्तोत्रDurgaRahu

देवी कवचम्

देवी महात्म्य का 28 श्लोकीय कवच — सृष्टि के प्रत्येक रूप में देवी का आह्वान। नवरात्रि में सप्तशती पाठ से पहले पढ़ा जाता है; भय निवारण और राहु से रक्षा हेतु।

पाठ करें
स्तोत्रDurgaRahu

महिषासुर मर्दिनि स्तोत्रम्

आदि शंकराचार्य का एकविंश श्लोकीय दुर्गा स्तोत्र (ऐ गिरि नन्दिनि)। नवरात्रि में राहु शांति, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और दिव्य साहस के लिए पढ़ा जाता है।

पाठ करें

अगला कदम

इसे अपनी कुंडली पर लागू करें