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स्तोत्रChandraChandra

चन्द्र अष्टकम् (चन्द्र स्तोत्रम्)

स्कन्द पुराण के आठ श्लोक जो चन्द्र देव — वैदिक ज्योतिष के मन-कारक — की स्तुति करते हैं। सोमवार को मानसिक शान्ति और कमजोर चन्द्र उपाय हेतु पाठ किया जाता है।

चन्द्र अष्टकम् (चन्द्र स्तोत्रम्)

चौपाई 1

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

Dadhi-shankha-tusharabham kshirodarnava-sambhavam. Namami shashinam somam shambhor-mukuta-bhushanam.

दही, शंख, तुषार समान श्वेत, क्षीरसागर से उत्पन्न — शम्भु के मुकुट-भूषण शशि, सोम को नमस्कार।

चौपाई 2

श्वेताम्बरः श्वेतविभूषणश्च श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहुः। चन्द्रोऽमृतात्मा वरदः किरीटी मयि प्रसादं विदधातु देवः॥

Shvetambarah shveta-vibhushanashcha shveta-dyutir-danda-dharo dvibahuh. Chandro-amritatma varadah kiriti mayi prasadam vidadhatu devah.

श्वेत वस्त्र, श्वेत आभूषण, श्वेत द्युति, दण्डधारी, द्विभुज — अमृतात्मा वरद किरीटी चन्द्र मुझ पर कृपा करें।

चौपाई 3

सोमं शिवोत्तमं शान्तं शशाङ्कं शशभूषणम्। निशानाथं प्रपन्नानां प्रभुं वन्दे निशाकरम्॥

Somam shivottamam shantam shashankam shasha-bhushanam. Nishanatham prapannanam prabhum vande nishakaram.

सोम, शिवोत्तम, शान्त, शशांक, शशभूषण, निशानाथ — शरणागतों के प्रभु निशाकर को वन्दन।

चौपाई 4

चन्द्रं मनोजवं दिव्यं निर्मलं विमलप्रभम्। मृगधारिणमिन्दुं च महातेजस्विनं प्रभुम्॥

Chandram manojavam divyam nirmalam vimala-prabham. Mriga-dharinam-indum cha mahatejasvinam prabhum.

मनोवेग, दिव्य, निर्मल, विमल प्रभा — मृगधारी इन्दु, महातेजस्वी प्रभु चन्द्र।

चौपाई 5

रोहिणीशं सुधामूर्तिं सुधाकरमनामयम्। ओषधीशं सुधास्पर्शमचिन्त्यं वरदं भजे॥

Rohinisham sudha-murtim sudhakaram-anamayam. Oshadhisham sudha-sparsham achintyam varadam bhaje.

रोहिणीपति, सुधामूर्ति, सुधाकर, रोगरहित, औषधीश, अमृतस्पर्श, अचिन्त्य वरद को भजता हूँ।

चौपाई 6

तारानाथमव्यक्तं कलानिधिमनामयम्। चन्द्रं कलानिधिं वन्दे हृदयाब्जे व्यवस्थितम्॥

Tarana-natham-avyaktam kalanidhim-anamayam. Chandram kalanidhim vande hridayabje vyavasthitam.

तारानाथ, अव्यक्त, कलानिधि, रोगरहित — हृदय-कमल में स्थित चन्द्र को वन्दन।

चौपाई 7

ग्लौरात्रिनाथं रजनीकरं तं कुमुद्वतीकान्तमनल्पतेजम्। कान्तिप्रदं सर्वजनप्रियं तं चन्द्रं नमामि प्रणवाभिरामम्॥

Glaur-atrinatham rajani-karam tam kumudvati-kantam-analpa-tejam. Kantipradam sarva-jana-priyam tam chandram namami pranavabhi-ramam.

अत्रि-नन्दिनीपति, रजनीकर, कुमुद्वती-प्रिय, अल्प नहीं तेज — कान्ति दाता, सर्वजन-प्रिय चन्द्र को नमस्कार।

चौपाई 8

अत्रेस्तनूजं विधुमम्बिकेशं कलानिधिं कामदमिन्दुमीड्यम्। यक्षाधिपं चन्द्रकलावतंसं चन्द्रं सदा शान्तमहं नमामि॥

Atres-tanujam vidhum-ambikesham kalanidhim kamadam-indum-idyam. Yakshadhipam chandra-kalavatan-sam chandram sada shantam-aham namami.

अत्रि-तनय, विधु, अम्बिकेश, कलानिधि, कामद, इन्दु, यक्षाधिप, चन्द्रकला-वतंस — शान्त चन्द्र को सदा नमस्कार।

चन्द्र अष्टकम् के बारे में

चन्द्र अष्टकम् हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो चन्द्र देव को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

  • चन्द्र ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को चन्द्र महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।

पाठ के लाभ

  • कमजोर चन्द्र से जुड़ी मानसिक अस्थिरता शांत करता है
  • सोमवार पाठ से चन्द्र दोष निवारण
  • सौन्दर्य, आकर्षण और मानसिक स्पष्टता
  • अवसाद, चिंता और नेत्र रोग में परंपरागत राहत

शुभ समय और विधि

सोमवार को चन्द्रोदय के बाद या प्रातः पढ़ें। चन्द्रमा की ओर मुख करें। मोती या स्फटिक माला का उपयोग करें। चन्द्र महादशा या अशुभ चन्द्र में विशेष लाभकारी।

ज्योतिषीय महत्व

नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।

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