लक्ष्मी अष्टकम्
यदुपत्याचार्य की आठ श्लोकीय स्तुति जो लक्ष्मी देवी — वैदिक ज्योतिष में शुक्र से जुड़ी धन-देवी — का आह्वान करती है। शुक्रवार और दीपावली को आर्थिक स्थिरता हेतु पाठ।

चौपाई 1
यस्याः कटाक्षमात्रेण ब्रह्मरुद्रेन्द्रपूर्वकाः। सुराः स्वीयपदान्यापुः सा लक्ष्मीर्मे प्रसीदतु॥
Yasyah kataakshamatreNa brahmarudrendrapurvakah. Surah sviyapadanyapuh sa lakshmirme prasidatu.
जिनकी कटाक्ष मात्र से ब्रह्मा, रुद्र, इन्द्र सहित देवताओं ने पद पाए — वह लक्ष्मी मुझ पर प्रसन्न हों।
चौपाई 2
याऽनादिकालतो मुक्ता सर्वदोषविवर्जिता। अनाद्यनुग्रहाद्विष्णोः सा लक्ष्मी प्रसीदतु॥
Ya-anadikaalato mukta sarvadoshavivariyita. Anadyanugrahad-vishnoh sa lakshmi prasidatu.
आदिकाल से मुक्त, सर्वदोषरहित, विष्णु के अनाद्य अनुग्रह से — लक्ष्मी प्रसन्न हों।
चौपाई 3
देशतः कालतश्चैव समव्याप्ता च तेन या। तथाऽप्यनुगुणा विष्णोः सा लक्ष्मीर्मे प्रसीदतु॥
Deshatah kalatashchaiva samavyapta cha tena ya. Tathapyanuguna vishnoh sa lakshmirme prasidatu.
देश-काल में व्याप्त, फिर भी विष्णु के अनुगुण — लक्ष्मी मुझ पर प्रसन्न हों।
चौपाई 4
ब्रह्मादिभ्योऽधिकं पात्रं केशवानुग्रहस्य या। जननी सर्वलोकानां सा लक्ष्मीर्मे प्रसीदतु॥
Brahmadibhyo-adhikam patram keshavanugrahasya ya. Janani sarvalokanam sa lakshmirme prasidatu.
ब्रह्मादि से अधिक केशवानुग्रह के पात्र, सर्वलोक जननी — लक्ष्मी प्रसन्न हों।
चौपाई 5
विश्वोत्पत्तिस्थितिलया यस्या मन्दकटाक्षतः। भवन्ति वल्लभा विष्णोः सा लक्ष्मीर्मे प्रसीदतु॥
Vishvotpattisthitilaya yasya mandakatakshatah. Bhavanti vallabha vishnoh sa lakshmirme prasidatu.
जिनकी मन्द कटाक्ष से सृष्टि-स्थिति-लय होते हैं — लक्ष्मी प्रसन्न हों।
चौपाई 6
यदुपासनया नित्यं भक्तिज्ञानादिकान् गुणान्। समाप्नुवन्ति मुनयः सा लक्ष्मीर्मे प्रसीदतु॥
Yadupasanaya nityam bhaktijnanadikan gunan. Samapnuvanti munayah sa lakshmirme prasidatu.
जिनकी उपासना से मुनि भक्ति-ज्ञान पाते हैं — लक्ष्मी प्रसन्न हों।
चौपाई 7
अनालोच्यापि यज्ज्ञानमीशादन्यत्र सर्वदा। समस्तवस्तुविषयं सा लक्ष्मीर्मे प्रसीदतु॥
Analochyapi yajjnanamishadanyatra sarvada. Samastavastuvishayam sa lakshmirme prasidatu.
जिनका ज्ञान बिना विचार सर्ववस्तु व्याप्त — लक्ष्मी प्रसन्न हों।
चौपाई 8
अभीष्टदाने भक्तानां कल्पवृक्षायिता तु या। सा लक्ष्मीर्मे ददात्विष्टं ऋजुसङ्घसमर्चिता॥
Abhishtadane bhaktanam kalpavrikshayita tu ya. Sa lakshmirme dadatvishtam rijusanghasamarchita.
भक्तों को कल्पवृक्ष समान वर देने वाली, ऋजुसङ्घार्चित — लक्ष्मी मेरी मनोकामना पूर्ण करें।
लक्ष्मी अष्टकम् के बारे में
लक्ष्मी अष्टकम् हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो लक्ष्मी देवी को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
- शुक्र ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को शुक्र महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।
पाठ के लाभ
- धन, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता आकर्षित करता है
- शुक्र महादशा या कमजोर शुक्र में बल देता है
- भक्ति, ज्ञान और मनोकामना पूर्ति
- शुक्रवार, दीपावली और धनतेरस पर पाठ
शुभ समय और विधि
शुक्रवार को वेदी शुद्ध कर पढ़ें। कमल, कुमकुम और मिष्ठान अर्पित करें। घी का दीपक जलाएँ। शुक्र होर में सर्वोत्तम। शुक्र उपाय हेतु श्री सूक्त से जोड़ें।
ज्योतिषीय महत्व
नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।