शुक्र चालीसा
शुक्र चालीसा शुक्र देव (शुक्र ग्रह) को समर्पित 40 चौपाइयों का स्तोत्र है। शुक्रवार, शुक्र महादशा या पीड़ित शुक्र में पाठ करने से वैदिक ज्योतिष में प्रेम, सौंदर्य और समृद्धि की कृपा मिलती है।

दोहा
श्री गणपति गुरु गउ़रि, शंकर हनुमत कीन्ह। बिनवउं शुभ फल देन हरि, मुद मंगल दीन॥
Shri Ganapati Guru Gauri, Shankar Hanumat Keenh | Binavaun Shubh Phal Den Hari, Mud Mangal Deen ||
श्री गणपति, गुरु, गौरी, शंकर, हनुमत को प्रणाम; शुभ मंगल फल की प्रार्थना।
चौपाई 1
जयति जयति शुक्र देव दयाला। करत सदा जनप्रतिपाला॥
Jayati Jayati Shukra Dev Dayala | Karat Sada Jan Pratipala ||
दयालु शुक्र देव की जय जो सदा भक्तों की रक्षा करते हैं।
चौपाई 2
श्वेताम्बर, श्वेत वारन, शोभित। मुख मंद, चंदन हिय लोभित॥
Shwetambar, Shwet Varan, Shobhit | Mukh Mand, Chandan Hiy Lobhit ||
श्वेत वस्त्र, श्वेत वर्ण शोभित; मंद मुख, चंदन से हृदय लोभित।
चौपाई 3
सुन्दर रत्नजटित आभूषण। प्रियहिं मधुर, शीतल सुवासण॥
Sundar Ratna Jatit Aabhushan | Priyahin Madhur, Sheetal Suvasan ||
सुंदर रत्नजटित आभूषण; प्रिय मधुर, शीतल सुगंध।
चौपाई 4
सप्त भुज, सोभा निधि लावण्य। करत सदा जन, मंगल कान्य॥
Sapt Bhuj, Sobha Nidhi Lavanya | Karat Sada Jan, Mangal Kanya ||
सप्त भुज, सोभा-लावण्य निधि; सदा जनों के लिए मंगल कार्य।
चौपाई 5
मंगलमय, सुख सदा सवारथ। दीनदयालु, कृपा निधि पारथ॥
Mangalmay, Sukh Sada Savarath | Deen Dayalu, Kripa Nidhi Parath ||
मंगलमय, सदा सुख में सवार; दीनदयालु, कृपा निधि।
चौपाई 6
शुभ्र स्वच्छ, गंगा जल जैसा। दर्शन से, हरषाय मनैसा॥
Shubhra Swachh, Ganga Jal Jaisa | Darshan Se, Harshaya Manaisa ||
शुभ्र स्वच्छ गंगाजल समान; दर्शन से मन हर्षित।
चौपाई 7
त्रिभुवन, महा मंगल कारी। दीनन हित, कृपा निधि सारी॥
Tribhuvan, Maha Mangal Kari | Deenan Hit, Kripa Nidhi Sari ||
त्रिभुवन के महा मंगलकारी; दीनहित कृपा निधि सार।
चौपाई 8
देव दानव, ऋषि मुनि भक्तन। कष्ट मिटावन, भंजन जगतन॥
Dev Danav, Rishi Muni Bhaktan | Kasht Mitavan, Bhanjan Jagatan ||
देव-दानव-ऋषि-मुनि-भक्तों के कष्ट मिटाने वाले।
चौपाई 9
मोहबारी, मनहर हियरा। सर्व विधि सुख, सौख्य फुलारा॥
Mohbari, Manhar Hiyara | Sarv Vidhi Sukh, Saukhya Phulara ||
मोहभरा मनहर हृदय; सर्व विधि सुख-सौख्य फैलाते।
चौपाई 10
करत क्रोध, चपल भुज धारी। कष्ट निवारण, संत दुखारी॥
Karat Krodh, Chapal Bhuj Dhari | Kasht Nivaran, Sant Dukhari ||
क्रोध करते, चपल भुज धारी; कष्ट निवारण, संत दुखारी।
चौपाई 11
शुभ्र वर्ण, तनु मंद सुहाना। कष्ट मिटावन, हर्षित नाना॥
Shubhra Varn, Tanu Mand Suhana | Kasht Mitavan, Harshit Nana ||
शुभ्र वर्ण, मंद सुहाना तन; कष्ट मिटावन, अनेक हर्षित।
चौपाई 12
दुष्ट हरण, सुजनन हितकारी। सर्व बाधा, निवारण न्यारी॥
Dusht Haran, Sujanan Hitkari | Sarv Badha, Nivaran Nyari ||
दुष्ट हरण, सुजन हितकारी; सर्व बाधा निवारण।
चौपाई 13
सुर पतिहिं, प्रभु कृपा विलासिन। कष्ट निवारण, शुभ्र सुवासिन॥
Sur Patihin, Prabhu Kripa Vilasin | Kasht Nivaran, Shubhra Suvasin ||
प्रभु कृपा विलासिन; कष्ट निवारण, शुभ्र सुवासिन।
चौपाई 14
वेद पुरान, पठत जन स्वामी। मनहरण, मोहबारी कामी॥
Ved Puran, Pathat Jan Swami | Manharan, Mohbari Kami ||
वेद-पुराण पठने वालों के स्वामी; मनहरण, मोहभरा कामी।
चौपाई 15
सप्त भुज, रत्नजटित माला। कष्ट निवारण, शुभ फलशाला॥
Sapt Bhuj, Ratna Jatit Mala | Kasht Nivaran, Shubh Phalshala ||
सप्त भुज, रत्नजटित माला; कष्ट निवारण, शुभ फलशाला।
चौपाई 16
सुख रक्षक, सर्वसुख दाता। सर्व कामना, फल दाता॥
Sukh Rakshak, Sarvasukh Data | Sarv Kamana, Phal Data ||
सुख रक्षक, सर्वसुख दाता; सर्व कामना फल दाता।
चौपाई 17
मानव कृत, पाप हरे प्रभु। सर्व बाधा, निवारण रघु॥
Manav Krit, Paap Hare Prabhu | Sarv Badha, Nivaran Raghu ||
मानवकृत पाप हरे प्रभु; सर्व बाधा निवारण।
चौपाई 18
रोग निवारण, दुख हरणकर। सर्व विधि, शुभ फल देनेकर॥
Rog Nivaran, Dukh Harankar | Sarv Vidhi, Shubh Phal Denekar ||
रोग निवारण, दुख हरणकर; सर्व विधि शुभ फल देने वाले।
चौपाई 19
नमन सकल, सुर नर मुनि करते। व्रत उपासक, दुख हरण करते॥
Naman Sakal, Sur Nar Muni Karte | Vrat Upasak, Dukh Haran Karte ||
सकल सुर-नर-मुनि नमन करते; व्रत उपासक के दुख हरण।
चौपाई 20
शरणागत, कृपा निधि सोइ। जन रक्षक, मोहे दुख होई॥
Sharanagat, Kripa Nidhi Soi | Jan Rakshak, Mohe Dukh Hoi ||
शरणागत को कृपा निधि; जन रक्षक, मेरे दुख हरो।
चौपाई 21
शुद्ध भाव, से जो नित गावै। सर्व सुख, परम पद पावै॥
Shuddh Bhav, Se Jo Nit Gavai | Sarv Sukh, Param Pad Pavai ||
शुद्ध भाव से नित गाने वाला सर्व सुख और परम पद पावे।
चौपाई 22
वृन्दावन में, मंदिर निर्मित। जहां शुद्ध भक्तन, सदा शरणागत॥
Vrindavan Mein, Mandir Nirmit | Jahan Shuddh Bhaktan, Sada Sharanagat ||
वृन्दावन में मंदिर निर्मित जहाँ शुद्ध भक्त सदा शरणागत।
चौपाई 23
संत जनन के, कष्ट मिटावत। भवबंधन से, सहज छुड़ावत॥
Sant Janan Ke, Kasht Mitavat | Bhavbandhan Se, Sahaj Chhudavat ||
संत जनों के कष्ट मिटावत; भवबंधन से सहज छुड़ावत।
चौपाई 24
सकल कामना, पूर्ण करावत। मोहभंग, भवसागर तरावत॥
Sakal Kamana, Poorn Karavat | Mohbhang, Bhavsagar Taravat ||
सकल कामना पूर्ण करावत; मोहभंग, भवसागर तरावत।
चौपाई 25
जयति जयति, कृपानिधान। शुक्र देव, श्री विश्व विद्धान॥
Jayati Jayati, Kripanidhan | Shukra Dev, Shri Vishva Viddhan ||
जयति जयति कृपानिधान शुक्र देव, श्री विश्व विद्वान।
चौपाई 26
प्रणवउं, नाथ सकल गुण सागर। विविध विघ्न हरन, सुखदायक॥
Pranavaun, Nath Sakal Gun Sagar | Vividh Vighna Haran, Sukhdayak ||
प्रणवउं नाथ सकल गुण सागर; विविध विघ्न हरण, सुखदायक।
चौपाई 27
सुर मुनि जनन, अति प्रिय स्वामी। शुभ्र वर्ण, रूप मनहारी॥
Sur Muni Janan, Ati Priya Swami | Shubhra Varn, Roop Manhari ||
सुर-मुनि जनों के अति प्रिय स्वामी; शुभ्र वर्ण, मनहारी रूप।
चौपाई 28
जय जय जय, श्री शुक्र दयाला। करहुं कृपा, भव बंधन ताला॥
Jai Jai Jai, Shri Shukra Dayala | Karahu Kripa, Bhav Bandhan Tala ||
जय जय जय श्री शुक्र दयाला; कृपा करो, भव बंधन ताला।
चौपाई 29
ध्यान धरत, जन होउं सुखारी। कृपा दृष्टि, शांति हितकारी॥
Dhyan Dharat, Jan Houn Sukhari | Kripa Drishti, Shanti Hitkari ||
ध्यान धरत जन सुखारी; कृपा दृष्टि, शांति हितकारी।
चौपाई 30
अधम कायर, सुबुद्धि सुधारो। मोह निवारण, कष्ट निवारो॥
Adham Kayar, Subuddhi Sudharo | Moh Nivaran, Kasht Nivaro ||
अधम कायर की सुबुद्धि सुधारो; मोह निवारण, कष्ट निवारो।
चौपाई 31
लक्ष्मीपति, शुभ फल दाता। संतजनन, दुख भंजन राता॥
Lakshmipati, Shubh Phal Data | Sant Janan, Dukh Bhanjan Rata ||
लक्ष्मीपति, शुभ फल दाता; संतजन दुख भंजन रत।
चौपाई 32
जय जय जय, कृपा निधि शुक्र। करहुं कृपा, हरहुं सब दु:ख॥
Jai Jai Jai, Kripa Nidhi Shukra | Karahu Kripa, Harahu Sab Dukh ||
जय जय जय कृपा निधि शुक्र; कृपा करो, सब दुःख हरो।
चौपाई 33
प्रणवउं नाथ, सकल गुण सागर। विविध विघ्न हरन, सुखदायक॥
Pranavaun Nath, Sakal Gun Sagar | Vividh Vighna Haran, Sukhdayak ||
प्रणवउं नाथ सकल गुण सागर; विविध विघ्न हरण, सुखदायक।
चौपाई 34
रूप तेज बल, संपन्न सदा। शांति दायक, जन सुख दाता॥
Roop Tej Bal, Sampann Sada | Shanti Dayak, Jan Sukh Data ||
रूप-तेज-बल संपन्न सदा; शांति दायक, जन सुख दाता।
चौपाई 35
त्रिभुवन में, मंगल करतू। सर्व बाधा, हरता शुकृ॥
Tribhuvan Mein, Mangal Kartu | Sarv Badha, Harta Shukra ||
त्रिभुवन में मंगल करतू; सर्व बाधा हर्ता शुक्र।
चौपाई 36
मानव कृत, पाप हरे प्रभु। सर्व बाधा, निवारण रघु॥
Manav Krit, Paap Hare Prabhu | Sarv Badha, Nivaran Raghu ||
मानवकृत पाप हरे प्रभु; सर्व बाधा निवारण।
चौपाई 37
रोग निवारण, दुख हरणकर। सर्व विधि, शुभ फल देनेकर॥
Rog Nivaran, Dukh Harankar | Sarv Vidhi, Shubh Phal Denekar ||
रोग निवारण, दुख हरणकर; सर्व विधि शुभ फल देने वाले।
चौपाई 38
प्रणवउं नाथ, सकल गुण सागर। विविध विघ्न हरन, सुखदायक॥
Pranavaun Nath, Sakal Gun Sagar | Vividh Vighna Haran, Sukhdayak ||
प्रणवउं नाथ सकल गुण सागर; विविध विघ्न हरण, सुखदायक।
चौपाई 39
ध्यान धरत, जन होउं सुखारी। कृपा दृष्टि, शांति हितकारी॥
Dhyan Dharat, Jan Houn Sukhari | Kripa Drishti, Shanti Hitkari ||
ध्यान धरत जन सुखारी; कृपा दृष्टि, शांति हितकारी।
चौपाई 40
जय जय जय, कृपा निधि शुक्र। करहुं कृपा, हरहुं सब दु:ख॥
Jai Jai Jai, Kripa Nidhi Shukra | Karahu Kripa, Harahu Sab Dukh ||
जय जय जय कृपा निधि शुक्र; कृपा करो, सब दुःख हरो।
दोहा
नमो नमो श्री शुक्र सुहावे। सर्व बाधा, कष्ट मिटावे॥ यह चालीसा, जो नित गावै। सुख संपत्ति, परम पद पावै॥
Namo Namo Shri Shukra Suhave | Sarv Badha, Kasht Mitave || Yah Chalisa, Jo Nit Gavai | Sukh Sampatti, Param Pad Pavai ||
श्री शुक्र सुहावे को नमो नमो; सर्व बाधा-कष्ट मिटावे। यह चालीसा नित गाने वाला सुख-संपत्ति-परम पद पावे।
शुक्र चालीसा के बारे में
शुक्र चालीसा हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो शुक्र देव को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
- शुक्र ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को शुक्र महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।
पाठ के लाभ
- कुंडली में कमजोर या पीड़ित शुक्र को मजबूत करता है
- प्रेम, विवाह सुख, सौंदर्य और भौतिक सुख देता है
- शुक्र दोष और संबंध-धन की बाधाएँ दूर करता है
- शुक्रवार को सफेद पुष्प और मिष्ठान अर्पण के साथ पारंपरिक पाठ
शुभ समय और विधि
शुक्रवार (शुक्र का दिन) को प्रातः या संध्या में पाठ करें। सफेद पुष्प, चावल, मिष्ठान अर्पित करें और घी का दीप जलाएँ। शुक्र महादशा में नियमित शुक्रवार पाठ विशेष शुभ है।
ज्योतिषीय महत्व
नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।