लक्ष्मी चालीसा
लक्ष्मी चालीसा धन-समृद्धि की दाता माँ लक्ष्मी को समर्पित स्तोत्र है। वैदिक ज्योतिष में लक्ष्मी पूजन शुक्र ग्रह का प्रमुख उपाय है — शुक्र महादशा में धन स्थिरता और सौभाग्य के लिए।

दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास ॥
Matu Lakshmi Kari Kripa | Karo Hriday Mein Vas ||
मातु लक्ष्मी कृपा कर हृदय में वास करें।
दोहा
मनोकामना सिद्ध करि परुवहु मेरी आस ॥
Manokamana Siddh Kari | Purvahu Meri Aas ||
मनोकामना सिद्ध कर मेरी आशा पूरी करें।
दोहा
यही मोर अरदास हाथ जोड़ विनती करुँ ॥
Yahi Mor Ardas | Hath Jod Vinati Karun ||
यही मेरी अरदास; हाथ जोड़ विनती करता हूँ।
दोहा
सब विधि करौ सुवास जय जननि जगदम्बिका ॥
Sab Vidhi Karau Suvas | Jai Janani Jagdambika ||
सब प्रकार सौभाग्य दें; जय जगदम्बिका।
चौपाई 1
सिन्धु सुताऽ मैं सुमिरौं तोही ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही ॥
Sindhu Suta Main Sumiraun Tohi | Gyan, Buddhi, Vidya Do Mohi ||
सिंधुकन्या, ज्ञान-बुद्धि-विद्या दें।
चौपाई 2
तुम समान नहिं कोई उपकारी सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥
Tum Saman Nahin Koi Upkari | Sab Vidhi Purvahu As Hamari ||
तुम्हारे समान उपकारी नहीं; आशा पूरी करें।
चौपाई 3
जय जय जगत जननी जगदम्बा सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥
Jai Jai Jagat Janani Jagdamba | Sabki Tum Hi Ho Avalamba ||
जगत जननी जगदम्बा, सबकी अवलंबा।
चौपाई 4
तुम ही हो सब घट-घट वासी विनती यही हमारी खासी ॥
Tum Hi Ho Sab Ghat-Ghat Vasi | Vinati Yahi Hamari Khasi ||
घट-घट वासिनी; यही विशेष विनती।
चौपाई 5
जगजननी जय सिन्धु कुमारी दीनन की तुम हो हितकारी ॥
Jagjanani Jai Sindhu Kumari | Deenan Ki Tum Ho Hitkari ||
सिंधु कुमारी, दीनहितकारिणी।
चौपाई 6
विनवौं नित्य तुम्हिं महारानी कृपा करौ जग जननि भवानी ॥
Vinavaun Nitya Tumhin Maharani | Kripa Karau Jag Janani Bhavani ||
नित्य विनती, महारानी; कृपा करें भवानी।
चौपाई 7
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥
Kehi Vidhi Stuti Karaun Tihari | Sudhi Lijai Aparadh Bisari ||
कैसे स्तुति करूँ? अपराध क्षमा करें।
चौपाई 8
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी जगजननी विनती सुन मोरी ॥
Kripa Drishti Chitvavo Mam Ori | Jagjanani Vinati Sun Mori ||
कृपा दृष्टि करें; विनती सुनें।
चौपाई 9
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता संकट हरो हमारी माता ॥
Gyan Buddhi Jai Sukh Ki Data | Sankat Haro Hamari Mata ||
ज्ञान-बुद्धि-सुख दाता; संकट हरें।
चौपाई 10
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो चौदह रत्न सिन्धु में पायो ॥
Kshirsindhu Jab Vishnu Mathayo | Chaudah Ratn Sindhu Mein Payo ||
क्षीरसागर मंथन से चौदह रत्न प्राप्त।
चौपाई 11
चौदह रत्न में तुम सुखरासी सेवा कियो प्रभु बनि दासी ॥
Chaudah Ratn Mein Tum Sukhrasi | Seva Kiyo Prabhu Bani Dasi ||
चौदह रत्न में सुखरासि; प्रभु की दासी बन सेवा की।
चौपाई 12
जब जब जन्म जहाँ प्रभु लीन्हा रूप बदल तहं सेवा कीन्हा ॥
Jab Jab Janm Jahan Prabhu Linha | Roop Badal Tahan Seva Kinha ||
प्रभु के जन्म पर रूप बदल सेवा की।
चौपाई 13
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥
Svayam Vishnu Jab Nar Tanu Dhara | Linheu Avadhpuri Avatara ||
विष्णु ने अवध में नर तनु धारा।
चौपाई 14
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥
Tab Tum Pragat Janakpur Mahin | Seva Kiyo Hriday Pulkaahin ||
जनकपुर में प्रकट हुईं; हृदय पुलकित सेवा की।
चौपाई 15
अपनाया तोहि अन्तर्यामी विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥
Apnaya Tohi Antaryami | Vishva Vidit Tribhuvan Ki Swami ||
अंतर्यामी त्रिभुवन स्वामी ने अपनाया।
चौपाई 16
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी कहं लौ महिमा कहौं बखानी ॥
Tum Sam Prabal Shakti Nahin Ani | Kahan Lau Mahima Kahaun Bakhani ||
तुम्हारे समान शक्ति नहीं; महिमा कहाँ तक कहूँ?
चौपाई 17
मन क्रम वचन करै सेवकाई मन इच्छित वाञ्छित फल पाई ॥
Man Kram Vachan Karai Sevakai | Man Ichchhit Vanchhit Phal Pai ||
मन-क्रम-वचन से सेवा करने पर मनोवांछित फल।
चौपाई 18
तजि छल कपट और चतुराई पूजहिं विविध भाँति मनलाई ॥
Taji Chhal Kapat Aur Chaturai | Pujahin Vividh Bhanti Manlai ||
छल-कपट त्यागकर भक्ति से पूजें।
चौपाई 19
और हाल मैं कहौं बुझाई जो यह पाठ करै मन लाई ॥
Aur Haal Main Kahaun Bujhai | Jo Yah Path Karai Man Lai ||
और बताता हूँ — मन लगाकर पाठ करने वाले को...
चौपाई 20
ताकाौ कोई कष्ट नोई मन इच्छित पावै फल सोई ॥
Takaau Koi Kasht Noi | Man Ichchhit Pavai Phal Soi ||
...कोई कष्ट नहीं; मनोवांछित फल मिले।
चौपाई 21
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि त्रिविध ताप भव बन्धन हारिणी ॥
Trahi Trahi Jay Dukh Nivarini | Trividh Tap Bhav Bandhan Harini ||
दुःख निवारिणी, त्रिविध ताप हारिणी, त्राहि त्राहि।
चौपाई 22
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै ध्यान लगाकर सुनै सुनावै ॥
Jo Chalisa Padhai Padhvai | Dhyan Lagakar Sunai Sunavai ||
चालीसा पढ़े, सुनाए, ध्यान लगाए...
चौपाई 23
ताकौ कोई न रोग सतावै पुत्र आदि धन समान पावै ॥
Takaau Koi Na Rog Satavai | Putra Adi Dhan Saman Pavai ||
रोग न सताए; पुत्र, धन समान प्राप्ति।
चौपाई 24
पुत्रहीन अरु सम्पति हीना अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना ॥
Putraheen Aru Sampati Heena | Andh Badhir Kodhi Ati Deena ||
पुत्रहीन, दरिद्र, अंध, बधिर, कोढ़ी, अति दीन।
चौपाई 25
विप्र बोलाय कै पाठ करावै शंका दिल में कभी न लावै ॥
Vipra Bolay Kai Path Karavai | Shanka Dil Mein Kabhi Na Lavai ||
विप्र बुलाकर पाठ कराएँ; हृदय में शंका न रखें।
चौपाई 26
पाठ करावै दिन चालीसा ता पर कृपा करैं गौरीसा ॥
Path Karavai Din Chalisa | Ta Par Kripa Karen Gaurisa ||
चालीस दिन पाठ कराएँ; गौरीश कृपा करें।
चौपाई 27
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै कमी नहीं काहू की आवै ॥
Sukh Sampatti Bahut Si Pavai | Kami Nahin Kahu Ki Avai ||
बहुत सुख-संपत्ति; किसी की कमी न रहे।
चौपाई 28
बारह मास करै जो पूजा तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ॥
Barah Maas Karai Jo Puja | Tehi Sam Dhanya Aur Nahin Duja ||
बारह मास पूजा करने वाला अत्यंत धन्य।
चौपाई 29
प्रतिदिन पाठ करै मन माही उन सम कोइ जग में कहुँ नाहीं ॥
Pratidin Path Karai Man Mahi | Un Sam Koi Jag Mein Kahun Nahin ||
प्रतिदिन पाठ करने वाले के सम जग में कोई नहीं।
चौपाई 30
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई लेय परीक्षा ध्यान लगाई ॥
Bahuvidhi Kya Main Karaun Badai | Ley Pariksha Dhyan Lagai ||
कैसे बड़ाई करूँ? ध्यान लगाकर परखें।
चौपाई 31
करि विश्वास करै व्रत नेमा होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा ॥
Kari Vishvas Karai Vrat Nema | Hoy Siddh Upjai Ur Prema ||
विश्वास, व्रत, नेम से सिद्धि और प्रेम उत्पन्न।
चौपाई 32
जय जय जय लक्ष्मी भवानी सब में व्यापित हो गुण खानी ॥
Jai Jai Jai Lakshmi Bhavani | Sab Mein Vyapit Ho Gun Khani ||
जय लक्ष्मी भवानी, गुणखानी सर्वव्यापिनी।
चौपाई 33
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं तुम सम कोऊ दयालु कहुँ नाहीं ॥
Tumharo Tej Prabal Jag Mahin | Tum Sam Kou Dayalu Kahun Nahin ||
जग में प्रबल तेज; तुमसे दयालु कोई नहीं।
चौपाई 34
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै संकट काटि भक्ति मोहि दीजै ॥
Mohi Anath Ki Sudhi Ab Lijai | Sankat Kati Bhakti Mohi Dijai ||
अनाथ की सुधि लें; संकट काट भक्ति दें।
चौपाई 35
भूल चूक करि क्षमा हमारी दर्शन दजै दशा निहारी ॥
Bhool Chook Kari Kshama Hamari | Darshan Dai Dasha Nihari ||
भूल-चूक क्षमा करें; दर्शन दें।
चौपाई 36
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी तुमहि अछत दुःख सहते भारी ॥
Bin Darshan Vyakul Adhikari | Tumhi Achhat Dukh Sahate Bhari ||
दर्शन बिन व्याकुल; भारी दुःख सहता हूँ।
चौपाई 37
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में सब जानत हो अपने मन में ॥
Nahin Mohin Gyan Buddhi Hai Tan Mein | Sab Janat Ho Apne Man Mein ||
शरीर में बुद्धि नहीं; आप मन में सब जानते हैं।
चौपाई 38
रुप चतुर्भुज करके धारण कष्ट मोर अब करहु निवारण ॥
Roop Chaturbhuj Karke Dharan | Kasht Mor Ab Karahu Nivaran ||
चतुर्भुज रूप धारकर कष्ट निवारण करें।
चौपाई 39
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई ॥
Kehi Prakar Main Karaun Badai | Gyan Buddhi Mohin Nahin Adhikai ||
कैसे बड़ाई करूँ? बुद्धि नहीं है।
दोहा
त्राहि त्राहि दुःख हारिणी हरो वेगि सब त्रास ॥
Trahi Trahi Dukh Harini | Haro Vegi Sab Tras ||
दुःख हारिणी, त्राहि त्राहि; त्रास शीघ्र हरें।
दोहा
जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रु को नाश ॥
Jayati Jayati Jai Lakshmi | Karo Shatru Ko Nash ||
जय लक्ष्मी; शत्रु नाश करें।
दोहा
रामदास धरि ध्यान नित विनय करत कर जोर ॥
Ramdas Dhari Dhyan Nit | Vinay Karat Kar Jor ||
रामदास नित्य ध्यान धर विनय करते हैं।
दोहा
मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर ॥
Matu Lakshmi Das Par | Karahu Daya Ki Kor ||
मातु लक्ष्मी दास पर दया की कोर करें।
लक्ष्मी चालीसा के बारे में
लक्ष्मी चालीसा हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो माँ लक्ष्मी को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
- शुक्र ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को शुक्र महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।
पाठ के लाभ
- धन, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता
- कमजोर शुक्र, शुक्र महादशा में राहत
- गृह, विवाह और संबंधों में सौहार्द
- दरिद्रता, ऋण और आर्थिक बाधा दूर
शुभ समय और विधि
शुक्रवार, दीपावली या लक्ष्मी पूजा में पाठ करें। संध्या में घी का दीप, कमल पुष्प और लाल वस्त्र से उत्तर/पूर्व मुख करें।
ज्योतिषीय महत्व
नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।