महामृत्युंजय मंत्र
ऋग्वेद ७.५९.१२ का महामृत्युंजय मंत्र (त्र्यम्बकं यजामहे) — भगवान शिव का महान मृत्यु-विजय मंत्र, स्वास्थ्य, दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए। सोमवार को 108 बार जप करें; कठिन अवधि में [शनि गोचर](/hi/blog/saturn-transit-effects) गाइड से जोड़ें।

चौपाई 1
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam | Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat ||
हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और पुष्टि-वर्धक भगवान (त्र्यम्बक) की पूजा करते हैं। जैसे ककड़ी अपने बन्धन (डंठल) से मुक्त होती है, वैसे ही मुझे मृत्यु से मुक्त करें — अमरत्व से नहीं।
महामृत्युंजय मंत्र के बारे में
महामृत्युंजय मंत्र हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो त्र्यम्बक (मृत्युञ्जय) रूप में भगवान शिव को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
पाठ के लाभ
- स्वास्थ्य, दीर्घायु और मृत्यु के भय के लिए सबसे शक्तिशाली वैदिक मंत्र
- गंभीर बीमारी, दुर्घटना और अपमृत्यु योग में पारंपरिक उपाय
- शनि और राहु-केतु पीड़ा में नकारात्मक कर्म निष्कासित कर सुरक्षा देता है
- ऋषि वशिष्ठ को प्राप्त; ऋग्वेद ७.५९.१२, यजुर्वेद और रुद्र प्रश्न में मिलता है
शुभ समय और विधि
सोमवार, महाशिवरात्रि, या श्रावण सोमवार को प्रतिदिन 108 बार जप करें। उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें। रुद्राक्ष माला उपयोग करें। जप से पहले शिवलिंग पर बिल्वपत्र, दूध और जल चढ़ाएँ।
ज्योतिषीय महत्व
नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।
यह एक-श्लोक वैदिक मंत्र महामृत्युंजय स्तोत्र से भिन्न है — गिनती वाले जप के लिए मंत्र, निरंतर स्तुति के लिए स्तोत्र। स्वास्थ्य पर शनि गोचर में शनि उपाय से जोड़ें। शनि ढैया भी देखें।