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आपकी विंशोत्तरी दशाएँ, तारीखों के साथ

अपनी जन्म तिथि और समय डालकर 120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र की हर महादशा, अभी चल रही महादशा की अंतर्दशाएँ और जन्म के समय पहली दशा का कितना भाग शेष था, देखें। लाहिरी अयनांश, जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से।

जन्म प्रमाणपत्र का समय डालें। चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए गलत जन्म समय से दशा की तारीखें महीनों खिसक सकती हैं।

विंशोत्तरी दशा कैसे काम करती है

विंशोत्तरी वैदिक ज्योतिष में सबसे अधिक प्रयुक्त दशा पद्धति है। यह 120 वर्ष के चक्र को नौ ग्रहों में एक तय क्रम में बाँटती है: केतु 7 वर्ष, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17। हर अवधि महादशा कहलाती है।

आपकी पहली महादशा उस नक्षत्र के स्वामी की होती है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था। चंद्रमा उस नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे तय होता है कि पहली दशा का कितना भाग बीत चुका था, यही जन्म के समय की शेष दशा है। बाकी महादशाएँ तय क्रम में आती हैं।

महादशा, अंतर्दशा और वे क्या दिखाती हैं

हर महादशा नौ अंतर्दशाओं (उप-अवधियों) में बँटी होती है, उसी क्रम में और महादशा के स्वामी से शुरू करके। अंतर्दशा की अवधि महादशा के वर्ष गुणा उसके अपने ग्रह के वर्ष, 120 से भाग देने पर आती है। परंपरा में महादशा उस काल का मुख्य विषय तय करती है और अंतर्दशा उसके भीतर का चरण दिखाती है।

दशा अकेली काम नहीं करती। उसका फल इस पर निर्भर है कि वह ग्रह आपकी कुंडली में कहाँ बैठा है, किन भावों का स्वामी है और राशि तथा दृष्टि से कैसे स्थित है। यह कैलकुलेटर समय बताता है; उसे ठीक से पढ़ने के लिए आपकी पूरी कुंडली चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्म तिथि से अपनी महादशा कैसे पता करें?

ऊपर अपनी जन्म तिथि, समय और समय क्षेत्र डालें। कैलकुलेटर चंद्रमा की निरयन स्थिति निकालकर उसका नक्षत्र लेता है और उसी नक्षत्र के स्वामी से आपकी महादशा का क्रम शुरू करता है। जिस महादशा में आज की तारीख आती है, वही अभी चल रही है।

विंशोत्तरी दशा क्या है?

यह वैदिक ज्योतिष की समय-निर्धारण पद्धति है जो 120 वर्ष के चक्र को नौ ग्रहों में बाँटती है। हर ग्रह एक तय अवधि की महादशा का स्वामी है, और आपका जन्म नक्षत्र तय करता है कि आप किससे शुरू करेंगे।

महादशा और अंतर्दशा में क्या अंतर है?

महादशा एक ग्रह की मुख्य अवधि है, जो 6 से 20 वर्ष चलती है। अंतर्दशा उसके भीतर की उप-अवधि है, जिसका स्वामी बारी-बारी से नौ ग्रह होते हैं। महादशा मोटा विषय देती है और अंतर्दशा उसके भीतर का चरण।

दशा के लिए जन्म समय क्यों मायने रखता है?

चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है और एक नक्षत्र 13 अंश 20 कला का होता है। चंद्रमा अपने नक्षत्र में किस बिंदु पर था, इससे तय होता है कि पहली दशा कितनी शेष थी। एक घंटे की भूल से हर दशा की तारीख कई महीने खिसक सकती है, और नक्षत्र की सीमा के पास पहली दशा का स्वामी भी बदल सकता है।

यह दशा कैलकुलेटर कौन-सा अयनांश उपयोग करता है?

लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारत का मानक है। रमन या केपी जैसे अन्य अयनांश वाले सॉफ़्टवेयर में चंद्रमा की स्थिति अंश के कुछ भाग से भिन्न हो सकती है, और इसलिए दशा की तारीखें दिनों या हफ्तों से भिन्न हो सकती हैं।

क्या चल रही दशा अच्छी है या बुरी?

कोई दशा अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती। उसका प्रभाव आपकी अपनी कुंडली में उस ग्रह की राशि, भाव, बल और दृष्टि पर, तथा उस अवधि के गोचर पर निर्भर करता है। तारीखों के लिए इस पृष्ठ का और अर्थ के लिए कुंडली-पाठ का उपयोग करें।

दशा समय बताती है, पूरी कहानी नहीं। चल रही दशा को अपनी कुंडली के भावों और गोचर के साथ पढ़वाने के लिए परामर्श बुक करें।

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