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शुभ मुहूर्त खोजक
कार्य, अपना शहर और अवधि चुनें। आपको क्रमवार दिन, हर दिन के पीछे के कारण और उस दिन का सबसे अच्छा समय मिलेगा, पूरे नियमों के साथ।
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विवाह मुहूर्त
विवाह की तिथियाँ, चातुर्मास, खरमास और गुरु-शुक्र अस्त के साथ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
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खोजक खोलेंगृह प्रवेश मुहूर्त
नए घर में प्रवेश, पंचक हटाकर और स्थिर लग्न के साथ
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कार और बाइक की डिलीवरी की तिथियाँ, चर चौघड़िया के साथ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
12 अक्टू॰ 2026, 23 अक्टू॰ 2026, 6 नव॰ 2026
खोजक खोलेंनामकरण मुहूर्त
नवजात के नामकरण संस्कार की तिथियाँ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
12 अक्टू॰ 2026, 24 अक्टू॰ 2026, 6 नव॰ 2026
खोजक खोलेंमुंडन मुहूर्त
पहले मुंडन (चूड़ाकरण) की तिथियाँ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
अगले 30 दिनों में कोई नहीं
खोजक खोलेंअन्नप्राशन मुहूर्त
छठे महीने में पहला अन्न ग्रहण
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
12 अक्टू॰ 2026, 19 अक्टू॰ 2026, 23 अक्टू॰ 2026
खोजक खोलेंउपनयन मुहूर्त
जनेऊ और यज्ञोपवीत की तिथियाँ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
अगले 30 दिनों में कोई नहीं
खोजक खोलेंकर्णवेध मुहूर्त
कान छेदन (कर्णवेध) की तिथियाँ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
अगले 30 दिनों में कोई नहीं
खोजक खोलेंविद्यारंभ मुहूर्त
विद्या का आरंभ और अक्षराभ्यास
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
12 अक्टू॰ 2026, 19 अक्टू॰ 2026, 23 अक्टू॰ 2026
खोजक खोलेंगोद भराई मुहूर्त
सातवें-नौवें महीने की गोद भराई की तिथियाँ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
12 अक्टू॰ 2026, 19 अक्टू॰ 2026, 23 अक्टू॰ 2026
खोजक खोलेंदुकान उद्घाटन मुहूर्त
दुकान, दफ़्तर या नया उद्यम खोलना
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
12 अक्टू॰ 2026, 21 अक्टू॰ 2026, 6 नव॰ 2026
खोजक खोलेंयात्रा मुहूर्त
यात्रा या तीर्थ का आरंभ
नई दिल्ली में अगली शुभ तिथियाँ
12 अक्टू॰ 2026, 19 अक्टू॰ 2026, 1 नव॰ 2026
खोजक खोलें
मुहूर्त क्या है
मुहूर्त का शाब्दिक अर्थ दिन-रात के तीस भागों में से 48 मिनट का एक भाग है। सामान्य उपयोग में इसका अर्थ किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए चुना गया शुभ समय है: विवाह, नए घर में प्रवेश, बच्चे के संस्कार, वाहन खरीदना, दुकान खोलना या यात्रा पर निकलना। लगभग 1600 ई. में राम दैवज्ञ द्वारा लिखा मुहूर्त चिंतामणि आज भी अधिकतर पंचांगों का आधार है।
हर कार्य की अपनी शुभ तिथियों, नक्षत्रों और वारों की सूची, अपनी ऋतु संबंधी रोक और दिन का अपना पसंदीदा समय होता है। हर कार्य का खोजक उसका नियम लागू करता है और पृष्ठ पर दिखाता है।
तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं
अवधि का हर दिन पंचांग के उन चार अंगों पर जाँचा जाता है जो मुहूर्त में मायने रखते हैं: तिथि, नक्षत्र, वार और योग, सभी सूर्योदय के समय। हर दिन 50 से शुरू होता है; कार्य की शुभ सूची का अंग 10 जोड़ता है और अशुभ सूची का अंग 15 घटाता है। अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि, रवि पुष्य और गुरु पुष्य 5 जोड़ते हैं, ज्वालामुखी 10 घटाता है। 50 से कम अंक वाले दिन हट जाते हैं, और वे भी जिन्हें नियम सीधे वर्जित करता है, जैसे एकादशी, ग्रहण या अधिक मास।
फिर ऋतु: खरमास, चातुर्मास, गुरु या शुक्र अस्त, होलाष्टक या पितृ पक्ष, जो भी उस कार्य पर लागू हों। इन्हीं पर परंपराएँ सबसे अधिक अलग हैं, इसलिए आप चाहें तो ये दिन छिपाने के बजाय चिह्न के साथ देख सकते हैं।
अंत में समय। बचे हुए हर दिन में चौघड़िया के शुभ खंड और अभिजित मुहूर्त लिए जाते हैं, और उनमें से राहु काल, यमगंड, गुलिक, दुर्मुहूर्त, वर्ज्यम, भद्रा और वे घंटे हटाए जाते हैं जब कोई अशुभ तिथि या नक्षत्र आरंभ हो चुका हो। जो सबसे अच्छा हिस्सा बचे, वही दिखाया गया समय है; अगर कम से कम 24 मिनट न बचें तो दिन हट जाता है। दिनों का क्रम अंक से, फिर समय की गुणवत्ता और लंबाई से तय होता है।
व्यक्तिगत तिथियाँ: तारा बल और चंद्र बल
कोई दिन सामान्य रूप से अच्छा होकर भी किसी एक व्यक्ति के लिए कमज़ोर हो सकता है। मुहूर्त चिंतामणि की दो जाँचें इसे व्यक्तिगत बनाती हैं। तारा बल जन्म नक्षत्र से दिन के नक्षत्र तक गिनकर नौ ताराओं के चक्र में बदलता है; तीसरी (विपत), पाँचवीं (प्रत्यरि) और सातवीं (वध) तारा अशुभ हैं। चंद्र बल में दिन का चंद्रमा जन्म राशि से किस भाव में है, यह देखा जाता है; 1, 3, 6, 7, 10 और 11 भाव शुभ हैं।
व्यक्तिगत मोड केवल वे घंटे रखता है जब दोनों शुभ हों, और जिन दिनों में ऐसा समय न बचे उन्हें हटा देता है। विवाह में शास्त्र वर और वधू दोनों को देखते हैं; दोनों के लिए अलग-अलग चलाएँ और ऐसी तिथि चुनें जो दोनों के लिए शुभ हो। कुछ ग्रंथ शुक्ल पक्ष में चंद्र बल और कृष्ण पक्ष में तारा बल को निर्णायक मानते हैं; हम दोनों को सख़्ती से लागू करते हैं।
शुभ मुहूर्त: सामान्य प्रश्न
शुभ मुहूर्त की गणना कैसे होती है?
दिन के पंचांग से: तिथि, नक्षत्र, वार और योग को कार्य की सूचियों से मिलाया जाता है, ऋतु संबंधी रोक लगाई जाती है, और दिन के भीतर शुभ चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त में से समय चुना जाता है, राहु काल, यमगंड, गुलिक और भद्रा से बचते हुए।
क्या हर शहर में मुहूर्त एक ही होता है?
शुभ तिथियाँ पूरे भारत में प्रायः समान रहती हैं, पर सूर्योदय, राहु काल और चौघड़िया स्थान के साथ बदलते हैं, इसलिए समय अलग होते हैं। हमेशा वह शहर चुनें जहाँ कार्यक्रम होना है।
व्यक्तिगत तिथियाँ क्या हैं?
कुंडली के साथ, खोजक उस व्यक्ति का तारा बल और चंद्र बल भी देखता है और केवल वे घंटे रखता है जब दोनों शुभ हों। यह प्लस और प्रो प्लान का हिस्सा है; सामान्य तिथियाँ निःशुल्क हैं।
पंचांग इन तिथियों से अलग क्यों हो सकता है?
पंचांग अलग-अलग परंपराओं पर चलते हैं। वे ऋतु संबंधी रोक, भद्रा पूरे दिन को दूषित करती है या केवल उसके घंटों को, गुरु-शुक्र के अस्त की सीमा और क्षेत्रीय रीतियों पर भिन्न होते हैं। यह पृष्ठ अपने पूरे नियम दिखाता है, ताकि आप देख सकें कि कोई तिथि क्यों है या क्यों नहीं।
क्या अभिजित मुहूर्त हर कार्य के लिए शुभ है?
अभिजित, यानी दोपहर का मुहूर्त, कई दोष दूर करने वाला माना जाता है और जब कोई और समय न मिले तब उपयोग होता है। बुधवार को इसका उपयोग नहीं होता, और कुछ ग्रंथ दक्षिण यात्रा के लिए इसे टालते हैं।
विवाह या घर का मुहूर्त पंचांग और परिवार की कुंडलियों, दोनों से तय करना सबसे अच्छा है। व्यक्तिगत मुहूर्त के लिए परामर्श बुक करें।
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