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स्तोत्रDurgaRahu
अंतिम अपडेट:द्वारा Rahul Arya

अर्गला स्तोत्रम् हिंदी लिरिक्स — Durga स्तोत्र का पाठ

देवी महात्म्य का अर्गला स्तोत्र (रूपं देहि जयं देहि) — दुर्गा सप्तशती पाठ का अंग। नवरात्रि में देवी कवच के बाद पढ़ा जाता है; राहु और भय से रक्षा हेतु शक्तिशाली।

अर्गला स्तोत्रम् — Durga Vedic Stotra with lyrics, meaning and benefits

चौपाई 1

ॐ जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि। जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥

Om jaya tvam devi chamunde jaya bhutapaharini. Jaya sarvagate devi kalaratri namo'stu te.

चामुण्डे, भूतापहारिणि, सर्वगते देवि कालरात्रि — जय हो, नमो नमः।

चौपाई 2

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

Jayanti mangala kali bhadrakali kapalini. Durga kshama shiva dhatri svaha svadha namo'stu te.

जयन्ती, मङ्गला काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा, स्वधा — नमो नमः।

चौपाई 3

मधुकैटभविध्वंसि विधातृवरदे नमः। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

Madhukaitabhavidhvamsi vidhatrivarade namah. Rupam dehi jayam dehi yasho dehi dvisho jahi.

मधुकैटभविध्वंसि विधातृवरदे — रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि।

चौपाई 4

महिषासुरनिर्नाशि भक्तानां सुखदे नमः। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

Mahishasuranirnashi bhaktanam sukhade namah. Rupam dehi jayam dehi yasho dehi dvisho jahi.

महिषासुरनिर्नाशि भक्तानां सुखदे — रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि।

चौपाई 5

रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

Raktabijavadhe devi chandamundavinashini. Rupam dehi jayam dehi yasho dehi dvisho jahi.

रक्तबीजवधे, चण्डमुण्डविनाशिनि — रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि।

चौपाई 6

निशुम्भशुम्भनिर्नाशि त्रिलोक्यशुभदे नमः। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

Nishumbhashumbhanirnashi trilokyashubhade namah. Rupam dehi jayam dehi yasho dehi dvisho jahi.

निशुम्भ-शुम्भनिर्नाशि, त्रिलोक्यशुभदे — रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि, द्विषो जहि।

चौपाई 7

इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः। सप्तशतीं समाराध्य वरमाप्नोति दुर्लभम्॥

Idam stotram pathitva tu mahastotram pathennarah. Saptashatim samaradhya varamapnoti durlabham.

यह इस अर्गला के बाद सप्तशती का पाठ करता है, वह दुर्लभ वर प्राप्त करता है।

अर्गला स्तोत्रम् के बारे में

अर्गला स्तोत्रम् हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो माँ दुर्गा को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

  • राहु ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को राहु महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।

पाठ के लाभ

  • देवी महात्म्य का दूसरा अंग — कवच के बाद, सप्तशती से पहले
  • प्रसिद्ध धुन 'रूपं देहि जयं देहि' — सौंदर्य, विजय, यश और शत्रु नाश
  • मधु-कैटभ, महिषासुर, रक्तबीज और शुम्भ-निशुम्भ विजय का स्मरण
  • देवी कवच और महिषासुर मर्दिनि के साथ नवरात्रि का अनिवार्य पाठ

शुभ समय और विधि

नवरात्रि में देवी कवच के बाद पढ़ें। मंगलवार और शुक्रवार को मातृ दिवस पर जप करें। प्रातः स्नान के बाद लाल या रुद्राक्ष माला से पाठ करें।

ज्योतिषीय महत्व

नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।

अर्गला स्तोत्रम् किन पर्वों में पढ़ा जाता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्गला स्तोत्रम् क्या है?

देवी महात्म्य का अर्गला स्तोत्र (रूपं देहि जयं देहि) — दुर्गा सप्तशती पाठ का अंग। नवरात्रि में देवी कवच के बाद पढ़ा जाता है; राहु और भय से रक्षा हेतु शक्तिशाली।

अर्गला स्तोत्रम् का पाठ हिंदी और अंग्रेज़ी में कहाँ पढ़ें?

इस पृष्ठ पर अर्गला स्तोत्रम् का पूरा पाठ मूल हिंदी (देवनागरी) में, अंग्रेज़ी लिप्यंतरण और अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ दिया गया है। संयुक्त दृश्य में तीनों साथ दिखते हैं, ताकि आप पढ़ सकें, याद कर सकें और पाठ कर सकें।

अर्गला स्तोत्रम् किसे समर्पित है?

अर्गला स्तोत्रम् Durga को समर्पित है। वैदिक ज्योतिष में इसे Rahu से भी जोड़ा जाता है।

मेरी कुंडली के लिए कौन-सा स्तोत्र उचित है?

स्तोत्र और मंत्र पारंपरिक रूप से कुंडली और चल रही दशा के अनुसार चुने जाते हैं। राहुल आर्य के साथ व्यक्तिगत परामर्श में आपकी कुंडली देखकर बताया जाता है कि कौन-सा पाठ आपके लिए उपयुक्त है।

अन्य Durga स्तोत्र और संबंधित पाठ

स्तोत्रDurgaRahu

देवी कवचम्

देवी महात्म्य का 28 श्लोकीय कवच — सृष्टि के प्रत्येक रूप में देवी का आह्वान। नवरात्रि में सप्तशती पाठ से पहले पढ़ा जाता है; भय निवारण और राहु से रक्षा हेतु।

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महिषासुर मर्दिनि स्तोत्रम्

आदि शंकराचार्य का एकविंश श्लोकीय दुर्गा स्तोत्र (ऐ गिरि नन्दिनि)। नवरात्रि में राहु शांति, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और दिव्य साहस के लिए पढ़ा जाता है।

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दुर्गा चालीसा

दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा को समर्पित 40 छंदों का भक्ति पाठ है। वैदिक ज्योतिष में राहु महादशा, राहु गोचर और भय-संकट के समय दुर्गा पूजन शक्तिशाली उपाय माना जाता है।

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अगला कदम

इसे अपनी कुंडली पर लागू करें

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