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आपके शहर के लिए विवाह की शुभ तिथियाँ, क्रम से, हर तिथि के अच्छे अंक के कारण और उस दिन के सबसे अच्छे समय के साथ। कुंडली जोड़ें तो केवल उस व्यक्ति के लिए शुभ तिथियाँ बचेंगी।

कार्यक्रम का स्थान

एक बार में अधिकतम छह महीने। खाली छोड़ें तो अगले तीन महीने। सूर्योदय, राहु काल और हर समय स्थान पर निर्भर है।

व्यक्तिगत तिथियाँ (तारा बल और चंद्र बल)

जन्म विवरण भरें या सहेजी कुंडली चुनें, ताकि वे दिन और घंटे हट जाएँ जब चंद्रमा जन्म नक्षत्र से अशुभ तारा में या जन्म राशि से अशुभ भाव में हो। व्यक्तिगत तिथियाँ प्लस और प्रो में मिलती हैं। सामान्य तिथियाँ सबके लिए निःशुल्क हैं।

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विवाह की शुभ तिथियाँ

13 अक्टू॰ 2026 से 13 जन॰ 2027 तक, New Delhi के लिए

क्रमतिथिअंकसबसे अच्छा समयकारण
126 नव॰ 2026गुरुवार808:46 pm – 11:30 pmअमृत, लाभ+ कृष्ण द्वितीया+ मृगशिरा+ गुरुवार
214 दिस॰ 2026सोमवार757:08 pm – 10:33 pmअमृत, लाभ+ शुक्ल पंचमी+ सोमवार+ सर्वार्थ सिद्धि योग
311 दिस॰ 2026शुक्रवार753:39 am (अगले दिन) – 7:04 am (अगले दिन)अमृत, लाभ+ शुक्ल द्वितीया+ शुक्रवार+ अमृत सिद्धि योग
425 नव॰ 2026बुधवार7510:27 pm – 1:49 am (अगले दिन)अमृत, लाभ+ रोहिणी+ बुधवार+ सर्वार्थ सिद्धि योग
530 नव॰ 2026सोमवार607:05 pm – 10:28 pmअमृत, लाभ+ कृष्ण सप्तमी− आश्लेषा+ सोमवार+ अमृत सिद्धि योग
610 दिस॰ 2026गुरुवार6011:53 am – 1:31 pmअभिजित मुहूर्त, लाभ+ मूल+ गुरुवार− ज्वालामुखी योग
712 दिस॰ 2026शनिवार608:26 am – 9:39 amशुभ+ शुक्ल तृतीया+ उत्तराषाढ़ा− शनिवार+ अमृत सिद्धि योग
821 नव॰ 2026शनिवार555:25 pm – 8:46 pmअमृत, लाभ+ शुक्ल द्वादशी+ उत्तर भाद्रपद− शनिवार
96 दिस॰ 2026रविवार559:35 am – 11:51 amअमृत, लाभ+ कृष्ण त्रयोदशी+ स्वाति− रविवार
1029 नव॰ 2026रविवार509:31 am – 10:59 amअमृत, लाभ− रविवार+ अमृत सिद्धि योग+ सर्वार्थ सिद्धि योग+ रवि पुष्य योग

विवरण

1. 26 नव॰ 2026, गुरुवार · 8:46 pm – 11:30 pm

कारण

  • तिथि: कृष्ण द्वितीया, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • नक्षत्र: मृगशिरा, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • वार: गुरुवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • योग: सिद्ध, किसी सूची में नहीं (0)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है
  • भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया

सबसे अच्छा समय: 8:46 pm – 11:30 pm (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण तृतीया, आर्द्रा

अन्य शुभ समय: 11:47 am – 1:27 pm (अभिजित मुहूर्त, लाभ); 4:05 pm – 5:24 pm (शुभ)

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: मिथुन 8:46 pm – 8:54 pm; कर्क 8:54 pm – 11:14 pm; सिंह 11:14 pm – 11:30 pm

सूर्योदय 6:52 am · सूर्यास्त 5:24 pm

टालें: राहु काल 1:27 pm – 2:46 pm; यमगंड 6:52 am – 8:11 am; गुलिक 9:30 am – 10:49 am

2. 14 दिस॰ 2026, सोमवार · 7:08 pm – 10:33 pm

कारण

  • तिथि: शुक्ल पंचमी, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • नक्षत्र: श्रवण, किसी सूची में नहीं (0)
  • वार: सोमवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • योग: व्याघात, किसी सूची में नहीं (0)
  • सर्वार्थ सिद्धि योग (+5)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है
  • पंचक लगा है: परंपरा में इसमें दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डालना और चारपाई बनाना टाला जाता है

सबसे अच्छा समय: 7:08 pm – 10:33 pm (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल पंचमी, धनिष्ठा

अन्य शुभ समय: 2:50 pm – 5:25 pm (अमृत, लाभ); 7:05 am – 8:22 am (अमृत); 12:15 am (अगले दिन) – 1:58 am (अगले दिन) (शुभ)

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: मिथुन 7:08 pm – 7:43 pm; कर्क 7:43 pm – 10:03 pm; सिंह 10:03 pm – 10:33 pm

सूर्योदय 7:05 am · सूर्यास्त 5:25 pm

टालें: राहु काल 8:22 am – 9:40 am; यमगंड 10:58 am – 12:15 pm; गुलिक 1:33 pm – 2:50 pm

3. 11 दिस॰ 2026, शुक्रवार · 3:39 am (अगले दिन) – 7:04 am (अगले दिन)

कारण

  • तिथि: शुक्ल द्वितीया, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा, किसी सूची में नहीं (0)
  • वार: शुक्रवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • योग: गण्ड, किसी सूची में नहीं (0)
  • अमृत सिद्धि योग (+5)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है

सबसे अच्छा समय: 3:39 am (अगले दिन) – 7:04 am (अगले दिन) (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल तृतीया, उत्तराषाढ़ा

अन्य शुभ समय: 5:25 pm – 7:07 pm (अमृत); 8:49 pm – 10:32 pm (शुभ); 12:36 pm – 1:16 pm (शुभ)

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: तुला 3:39 am (अगले दिन) – 5:08 am (अगले दिन); वृश्चिक 5:08 am (अगले दिन) – 7:04 am (अगले दिन)

सूर्योदय 7:03 am · सूर्यास्त 5:25 pm

टालें: राहु काल 10:56 am – 12:14 pm; यमगंड 2:49 pm – 4:07 pm; गुलिक 8:21 am – 9:38 am

4. 25 नव॰ 2026, बुधवार · 10:27 pm – 1:49 am (अगले दिन)

कारण

  • तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, किसी सूची में नहीं (0)
  • नक्षत्र: रोहिणी, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • वार: बुधवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • योग: शिव, किसी सूची में नहीं (0)
  • सर्वार्थ सिद्धि योग (+5)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है

सबसे अच्छा समय: 10:27 pm – 1:49 am (अगले दिन) (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण द्वितीया, मृगशिरा

अन्य शुभ समय: 3:30 am (अगले दिन) – 5:11 am (अगले दिन) (शुभ); 4:05 pm – 5:24 pm (लाभ); 6:51 am – 8:10 am (लाभ)

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: कर्क 10:27 pm – 11:18 pm; सिंह 11:18 pm – 1:35 am (अगले दिन); कन्या 1:35 am (अगले दिन) – 1:49 am (अगले दिन)

सूर्योदय 6:51 am · सूर्यास्त 5:24 pm

टालें: राहु काल 12:07 pm – 1:27 pm; यमगंड 8:10 am – 9:29 am; गुलिक 10:48 am – 12:07 pm

5. 30 नव॰ 2026, सोमवार · 7:05 pm – 10:28 pm

कारण

  • तिथि: कृष्ण सप्तमी, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • नक्षत्र: आश्लेषा, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
  • वार: सोमवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • योग: इन्द्र, किसी सूची में नहीं (0)
  • अमृत सिद्धि योग (+5)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है
  • भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
  • गंडांत संधि इस दिन है: वह समय मुहूर्त से बाहर रखा गया

सबसे अच्छा समय: 7:05 pm – 10:28 pm (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण सप्तमी, मघा

अन्य शुभ समय: 3:27 pm – 5:23 pm (अमृत, लाभ)

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: मिथुन 7:05 pm – 8:38 pm; कर्क 8:38 pm – 10:28 pm

सूर्योदय 6:55 am · सूर्यास्त 5:23 pm

टालें: राहु काल 8:13 am – 9:32 am; यमगंड 10:51 am – 12:09 pm; गुलिक 1:28 pm – 2:46 pm

6. 10 दिस॰ 2026, गुरुवार · 11:53 am – 1:31 pm

कारण

  • तिथि: शुक्ल प्रतिपदा, किसी सूची में नहीं (0)
  • नक्षत्र: मूल, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • वार: गुरुवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • योग: शूल, किसी सूची में नहीं (0)
  • ज्वालामुखी योग (−10)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है

सबसे अच्छा समय: 11:53 am – 1:31 pm (अभिजित मुहूर्त, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल द्वितीया, मूल

अन्य शुभ समय: 1:56 am (अगले दिन) – 3:38 am (अगले दिन) (शुभ); 8:49 pm – 10:10 pm (लाभ); 4:07 pm – 5:24 pm (शुभ)

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: कुंभ 11:53 am – 12:48 pm; मीन 12:48 pm – 1:31 pm

सूर्योदय 7:02 am · सूर्यास्त 5:24 pm

टालें: राहु काल 1:31 pm – 2:49 pm; यमगंड 7:02 am – 8:20 am; गुलिक 9:38 am – 10:56 am

7. 12 दिस॰ 2026, शनिवार · 8:26 am – 9:39 am

कारण

  • तिथि: शुक्ल तृतीया, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • वार: शनिवार, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
  • योग: वृद्धि, किसी सूची में नहीं (0)
  • अमृत सिद्धि योग (+5)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है
  • भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया

सबसे अच्छा समय: 8:26 am – 9:39 am (शुभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल तृतीया, उत्तराषाढ़ा

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: धनु 8:26 am – 9:31 am; मकर 9:31 am – 9:39 am

सूर्योदय 7:04 am · सूर्यास्त 5:25 pm

टालें: राहु काल 9:39 am – 10:57 am; यमगंड 1:32 pm – 2:50 pm; गुलिक 7:04 am – 8:21 am

8. 21 नव॰ 2026, शनिवार · 5:25 pm – 8:46 pm

कारण

  • तिथि: शुक्ल द्वादशी, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • वार: शनिवार, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
  • योग: सिद्धि, किसी सूची में नहीं (0)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है
  • गंडांत संधि इस दिन है: वह समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
  • पंचक लगा है: परंपरा में इसमें दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डालना और चारपाई बनाना टाला जाता है

सबसे अच्छा समय: 5:25 pm – 8:46 pm (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल द्वादशी, रेवती

अन्य शुभ समय: 2:46 pm – 4:05 pm (अमृत); 11:45 am – 12:28 pm (अभिजित मुहूर्त); 10:26 pm – 12:07 am (अगले दिन) (शुभ)

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: वृषभ 5:25 pm – 6:59 pm; मिथुन 6:59 pm – 8:46 pm

सूर्योदय 6:48 am · सूर्यास्त 5:25 pm

टालें: राहु काल 9:27 am – 10:47 am; यमगंड 1:26 pm – 2:46 pm; गुलिक 6:48 am – 8:07 am

9. 6 दिस॰ 2026, रविवार · 9:35 am – 11:51 am

कारण

  • तिथि: कृष्ण त्रयोदशी, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • नक्षत्र: स्वाति, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
  • वार: रविवार, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
  • योग: शोभन, किसी सूची में नहीं (0)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है
  • भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया

सबसे अच्छा समय: 9:35 am – 11:51 am (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण त्रयोदशी, स्वाति

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: धनु 9:35 am – 9:54 am; मकर 9:54 am – 11:37 am; कुंभ 11:37 am – 11:51 am

सूर्योदय 6:59 am · सूर्यास्त 5:24 pm

टालें: राहु काल 4:06 pm – 5:24 pm; यमगंड 12:12 pm – 1:30 pm; गुलिक 2:48 pm – 4:06 pm

10. 29 नव॰ 2026, रविवार · 9:31 am – 10:59 am

कारण

  • तिथि: कृष्ण षष्ठी, किसी सूची में नहीं (0)
  • नक्षत्र: पुष्य, किसी सूची में नहीं (0)
  • वार: रविवार, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
  • योग: ब्रह्म, किसी सूची में नहीं (0)
  • अमृत सिद्धि योग (+5)
  • सर्वार्थ सिद्धि योग (+5)
  • रवि पुष्य योग (+5)
  • सूर्य वृश्चिक में: मुहूर्त चिंतामणि इसे विवाह के सौर मासों में गिनता है
  • भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
  • गंडांत संधि इस दिन है: वह समय मुहूर्त से बाहर रखा गया

सबसे अच्छा समय: 9:31 am – 10:59 am (अमृत, लाभ)

उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण षष्ठी, पुष्य

सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: धनु 9:31 am – 10:22 am; मकर 10:22 am – 10:59 am

सूर्योदय 6:54 am · सूर्यास्त 5:23 pm

टालें: राहु काल 4:05 pm – 5:23 pm; यमगंड 12:09 pm – 1:27 pm; गुलिक 2:46 pm – 4:05 pm

हटाए गए दिन (83) और कारण
13 अक्टू॰ 2026अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
14 अक्टू॰ 2026चातुर्मास
15 अक्टू॰ 2026चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
16 अक्टू॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास
17 अक्टू॰ 2026चातुर्मास
18 अक्टू॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
19 अक्टू॰ 2026चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
20 अक्टू॰ 2026अंक 20, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त
21 अक्टू॰ 2026चातुर्मास; शुक्र अस्त
22 अक्टू॰ 2026सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; चातुर्मास; शुक्र अस्त
23 अक्टू॰ 2026चातुर्मास; शुक्र अस्त
24 अक्टू॰ 2026चातुर्मास; शुक्र अस्त
25 अक्टू॰ 2026अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
26 अक्टू॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त
27 अक्टू॰ 2026अंक 20, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
28 अक्टू॰ 2026चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
29 अक्टू॰ 2026चातुर्मास; शुक्र अस्त
30 अक्टू॰ 2026चातुर्मास
31 अक्टू॰ 2026अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास
1 नव॰ 2026चातुर्मास
2 नव॰ 2026अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
3 नव॰ 2026अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास
4 नव॰ 2026चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
5 नव॰ 2026सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; चातुर्मास
6 नव॰ 2026चातुर्मास
7 नव॰ 2026चातुर्मास
8 नव॰ 2026अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
9 नव॰ 2026चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
10 नव॰ 2026अंक 20, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास
11 नव॰ 2026चातुर्मास
12 नव॰ 2026चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
13 नव॰ 2026चातुर्मास
14 नव॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास
15 नव॰ 2026चातुर्मास
16 नव॰ 2026चातुर्मास
17 नव॰ 2026अंक 25, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
18 नव॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
19 नव॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास
20 नव॰ 2026चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
22 नव॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
23 नव॰ 2026अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
24 नव॰ 2026अंक 10, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
27 नव॰ 2026राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
28 नव॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
1 दिस॰ 2026अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
2 दिस॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
3 दिस॰ 2026राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
4 दिस॰ 2026सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है
5 दिस॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
7 दिस॰ 2026अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
8 दिस॰ 2026अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
9 दिस॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
13 दिस॰ 2026अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
15 दिस॰ 2026अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं
16 दिस॰ 2026खरमास
17 दिस॰ 2026अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
18 दिस॰ 2026खरमास
19 दिस॰ 2026खरमास
20 दिस॰ 2026सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
21 दिस॰ 2026खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
22 दिस॰ 2026अंक 40, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास
23 दिस॰ 2026खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
24 दिस॰ 2026खरमास
25 दिस॰ 2026खरमास
26 दिस॰ 2026खरमास
27 दिस॰ 2026अंक 10, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास
28 दिस॰ 2026खरमास
29 दिस॰ 2026अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास
30 दिस॰ 2026खरमास
31 दिस॰ 2026खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
1 जन॰ 2027खरमास
2 जन॰ 2027खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
3 जन॰ 2027सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; खरमास
4 जन॰ 2027खरमास
5 जन॰ 2027अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
6 जन॰ 2027खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा
7 जन॰ 2027अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास
8 जन॰ 2027खरमास
9 जन॰ 2027खरमास
10 जन॰ 2027खरमास
11 जन॰ 2027खरमास
12 जन॰ 2027अंक 20, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास
13 जन॰ 2027खरमास

समय चुने गए स्थान के स्थानीय समय में हैं और मिनट तक पूर्णांकित हैं। ग्रह स्थिति लाहिरी अयनांश से है; सूर्योदय, चौघड़िया और राहु काल लाइब्रेरी के पंचांग से हैं, जो प्रकाशित पंचांगों से कुछ मिनट के भीतर मिलते हैं। इसे शॉर्टलिस्ट मानें: विवाह या गृह प्रवेश के लिए अंतिम मुहूर्त और लग्न अपने पुरोहित से पक्का करें।

इस पृष्ठ पर प्रयुक्त नियम

ये सूचियाँ panchang-ts लाइब्रेरी के इस कार्य के मानक नियम से हैं, जो मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त दर्पण और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र का हवाला देता है। तिथि, नक्षत्र और वार सूर्योदय के समय देखे जाते हैं, जैसा लाइब्रेरी करती है। * चिह्न वाले हमारे सुधार हैं (नीचे देखें)। हर दिन 50 से शुरू होता है। उत्तीर्ण अंक: 50।

शुभ तिथियाँ (+10)शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया, शुक्ल पंचमी, शुक्ल सप्तमी, शुक्ल एकादशी, शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी, कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया, कृष्ण पंचमी, कृष्ण सप्तमी, कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
अशुभ तिथियाँ (−15)शुक्ल चतुर्थी, शुक्ल अष्टमी, शुक्ल नवमी*, शुक्ल चतुर्दशी, पूर्णिमा, कृष्ण चतुर्थी, कृष्ण अष्टमी, कृष्ण नवमी*, कृष्ण चतुर्दशी, अमावस्या
शुभ नक्षत्र (+10)रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती
अशुभ नक्षत्र (−15)भरणी, कृत्तिका, आश्लेषा, विशाखा, ज्येष्ठा
शुभ वार (+10)सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
अशुभ वार (−15)रविवार, मंगलवार, शनिवार
योगकोई सूची नहीं; अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि, रवि पुष्य और गुरु पुष्य +5, ज्वालामुखी −10।
पूरा दिन वर्जित जबसूर्योदय पर एकादशी, ग्रहण, अधिक मास
शुभ समय से बाहर रखा गयाराहु काल, यमगंड, गुलिक, दुर्मुहूर्त, वर्ज्यम, और वे घंटे जब अशुभ तिथि या नक्षत्र चल रहा हो; भद्रा (विष्टि करण); गंडांत संधि. समय इनमें से चुना जाता है: अभिजित मुहूर्त (बुधवार को नहीं) और चौघड़िया अमृत, शुभ, लाभ; रात के चौघड़िया भी।
ऋतु संबंधी रोक (परंपराएँ भिन्न)खरमास, चातुर्मास, गुरु अस्त, शुक्र अस्त, होलाष्टक
पसंदीदा लग्नकोई नहीं

जहाँ हम लाइब्रेरी से अलग हैं

  • रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या सदा अशुभ गिनी जाती हैं। कुछ मानक सूचियाँ इनमें से किसी को शुभ में रखती हैं, जैसे शुक्ल चतुर्दशी, जो परंपरा से अधिक 0 और 1 से गिनती की चूक लगती है। इन्हें * से चिह्नित किया गया है।
  • भद्रा: भद्रा का स्पर्श होते ही लाइब्रेरी पूरा दिन हटा देती है, जिससे हमारी जाँच में लगभग 40% दिन हट गए। मुहूर्त चिंतामणि विष्टि करण की अवधि वर्जित करता है, इसलिए हम दिन रखते हैं और भद्रा का समय मुहूर्त से बाहर रखते हैं।
  • गंड मूल: जहाँ नियम इसे वर्जित करता है, लाइब्रेरी हर वह दिन हटा देती है जिसके सूर्योदय पर चंद्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में हो, जबकि वही मघा, मूल और रेवती को विवाह के लिए शुभ मानती है। गंड मूल जन्म का नियम है; मुहूर्त में शास्त्र गंडांत संधि टालते हैं, इसलिए हम हर संधि के दोनों ओर एक चरण का समय मुहूर्त से बाहर रखते हैं।

जहाँ परंपराएँ अलग हैं

खरमास
सूर्य धनु राशि (लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी) या मीन राशि (लगभग मध्य मार्च से मध्य अप्रैल) में हो, इसे मलमास भी कहते हैं। मुहूर्त चिंतामणि विवाह के लिए इन सौर मासों को नहीं गिनता। उत्तर भारतीय पंचांग खरमास में विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन नहीं रखते। कई दक्षिण भारतीय परिवार यह नियम नहीं मानते; तमिलनाडु में इसके स्थान पर मार्गऴि मास में विवाह टाले जाते हैं।
चातुर्मास
देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से प्रबोधिनी या देव उठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) तक के चार महीने, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं। उत्तर भारत में विवाह और गृह प्रवेश देव उठनी एकादशी तक रुकते हैं। दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में श्रावण में विवाह होते हैं और इसकी जगह आडि सौर मास टाला जाता है; विद्या आरंभ के लिए विजयादशमी, जो चातुर्मास में ही आती है, सबसे प्रिय दिन है।
गुरु अस्त
गुरु सूर्य से 11 अंश के भीतर हो (सूर्य सिद्धांत की अस्त सीमा) और दिखाई न दे। शास्त्र गुरु अस्त में विवाह, उपनयन और अन्य संस्कार वर्जित मानते हैं। जो पंचांग अस्त का समय दृश्यता से निकालते हैं, उनकी तिथियाँ 11 अंश के नियम से कुछ दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, और कुछ दोनों ओर के कुछ दिन (बाल्य और वृद्ध) भी छोड़ते हैं।
शुक्र अस्त
शुक्र सूर्य से 10 अंश के भीतर, या वक्री होने पर 8 अंश के भीतर हो। शुक्र विवाह और सुख का कारक है, इसलिए शुक्र अस्त में विवाह और नए घर में प्रवेश टाले जाते हैं। गुरु की तरह दृश्यता पर आधारित पंचांग कुछ दिन अलग हो सकते हैं। कुछ क्षेत्रीय परंपराएँ शुक्र अस्त केवल विवाह के लिए टालती हैं, अन्य संस्कारों के लिए नहीं।
होलाष्टक
फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन तक के आठ दिन। मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में माना जाता है। दक्षिण और पूर्व भारत का अधिकांश भाग इसे नहीं मानता।

विवाह मुहूर्त में क्या देखा जाता है

संस्कारों में विवाह का समय सबसे सावधानी से चुना जाता है। पंचांग पहले वर्ष को उस मौसम तक सीमित करता है जब विवाह होते ही हैं, फिर ऐसे दिन चुनता है जिनकी तिथि, नक्षत्र और वार स्थायी बंधन के अनुकूल हों, और अंत में पुरोहित फेरों या सप्तपदी का लग्न तय करते हैं।

यहाँ का नियम रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती को शुभ मानता है, और भरणी, कृत्तिका, आश्लेषा, विशाखा और ज्येष्ठा को टालता है। सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ हैं; रविवार, मंगलवार और शनिवार अंक घटाते हैं, यद्यपि कुछ पंचांग रविवार स्वीकार करते हैं।

विवाह का मौसम

उत्तर भारत में आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से कार्तिक की देव उठनी एकादशी तक चातुर्मास में विवाह रुकते हैं, और फिर खरमास में, जब सूर्य धनु या मीन में हो। गुरु या शुक्र अस्त होने पर भी विवाह टलते हैं, क्योंकि गुरु वधू का और शुक्र स्वयं विवाह का कारक है। इसीलिए मुख्य मौसम लगभग नवंबर के अंत से मध्य दिसंबर, मध्य जनवरी से मार्च की शुरुआत, और मध्य अप्रैल से जुलाई की शुरुआत तक रहते हैं।

मुहूर्त चिंतामणि सूर्य के मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर और कुंभ में रहने वाले सौर मासों को विवाह के लिए बताता है। हम इसे हर तिथि पर दिखाते हैं पर अंक नहीं देते, क्योंकि उत्तर भारतीय पंचांग चातुर्मास खत्म होने पर सूर्य के तुला में रहते भी विवाह तिथियाँ देते हैं।

रात के मुहूर्त और लग्न

उत्तर भारत में कई विवाह शाम या रात में, गोधूलि या किसी स्थिर लग्न में होते हैं, इसलिए विवाह के लिए खोजक रात के चौघड़िया भी देखता है। सबसे अच्छे समय में उदित होने वाले लग्न सूचीबद्ध हैं ताकि पुरोहित सटीक क्षण चुन सकें; सामान्यतः स्थिर या द्विस्वभाव लग्न, जिसमें 1, 7 और 10 भाव में शुभ ग्रह हों, लक्ष्य रहता है।

  • पहले दोनों कुंडलियों का मिलान (गुण मिलान और मांगलिक) करें; अच्छी तिथि मिलान का विकल्प नहीं है।
  • व्यक्तिगत मोड वर और वधू के लिए अलग-अलग चलाएँ और वे तिथियाँ रखें जो दोनों के लिए शुभ हों।
  • मुख्य तिथियों के लिए स्थान जल्दी बुक करें; परिवार प्रायः तीन-चार तिथियाँ चुनकर अंतिम निर्णय पुरोहित पर छोड़ते हैं।

तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

अवधि का हर दिन पंचांग के उन चार अंगों पर जाँचा जाता है जो मुहूर्त में मायने रखते हैं: तिथि, नक्षत्र, वार और योग, सभी सूर्योदय के समय। हर दिन 50 से शुरू होता है; कार्य की शुभ सूची का अंग 10 जोड़ता है और अशुभ सूची का अंग 15 घटाता है। अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि, रवि पुष्य और गुरु पुष्य 5 जोड़ते हैं, ज्वालामुखी 10 घटाता है। 50 से कम अंक वाले दिन हट जाते हैं, और वे भी जिन्हें नियम सीधे वर्जित करता है, जैसे एकादशी, ग्रहण या अधिक मास।

फिर ऋतु: खरमास, चातुर्मास, गुरु या शुक्र अस्त, होलाष्टक या पितृ पक्ष, जो भी उस कार्य पर लागू हों। इन्हीं पर परंपराएँ सबसे अधिक अलग हैं, इसलिए आप चाहें तो ये दिन छिपाने के बजाय चिह्न के साथ देख सकते हैं।

अंत में समय। बचे हुए हर दिन में चौघड़िया के शुभ खंड और अभिजित मुहूर्त लिए जाते हैं, और उनमें से राहु काल, यमगंड, गुलिक, दुर्मुहूर्त, वर्ज्यम, भद्रा और वे घंटे हटाए जाते हैं जब कोई अशुभ तिथि या नक्षत्र आरंभ हो चुका हो। जो सबसे अच्छा हिस्सा बचे, वही दिखाया गया समय है; अगर कम से कम 24 मिनट न बचें तो दिन हट जाता है। दिनों का क्रम अंक से, फिर समय की गुणवत्ता और लंबाई से तय होता है।

व्यक्तिगत तिथियाँ: तारा बल और चंद्र बल

कोई दिन सामान्य रूप से अच्छा होकर भी किसी एक व्यक्ति के लिए कमज़ोर हो सकता है। मुहूर्त चिंतामणि की दो जाँचें इसे व्यक्तिगत बनाती हैं। तारा बल जन्म नक्षत्र से दिन के नक्षत्र तक गिनकर नौ ताराओं के चक्र में बदलता है; तीसरी (विपत), पाँचवीं (प्रत्यरि) और सातवीं (वध) तारा अशुभ हैं। चंद्र बल में दिन का चंद्रमा जन्म राशि से किस भाव में है, यह देखा जाता है; 1, 3, 6, 7, 10 और 11 भाव शुभ हैं।

व्यक्तिगत मोड केवल वे घंटे रखता है जब दोनों शुभ हों, और जिन दिनों में ऐसा समय न बचे उन्हें हटा देता है। विवाह में शास्त्र वर और वधू दोनों को देखते हैं; दोनों के लिए अलग-अलग चलाएँ और ऐसी तिथि चुनें जो दोनों के लिए शुभ हो। कुछ ग्रंथ शुक्ल पक्ष में चंद्र बल और कृष्ण पक्ष में तारा बल को निर्णायक मानते हैं; हम दोनों को सख़्ती से लागू करते हैं।

सभी मुहूर्त खोजक

विवाह मुहूर्त: सामान्य प्रश्न

विवाह के लिए कौन से महीने सबसे अच्छे हैं?

उत्तर भारतीय परंपरा में: देव उठनी एकादशी के बाद मध्य दिसंबर में खरमास शुरू होने तक, फिर मकर संक्रांति से होलाष्टक से पहले तक, और मध्य अप्रैल से देवशयनी एकादशी तक, बशर्ते गुरु और शुक्र अस्त न हों। आपकी चुनी अवधि पर खोजक यही नियम लगाता है।

चातुर्मास और खरमास में विवाह क्यों नहीं होते?

चातुर्मास में विवाह के साक्षी भगवान विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं, और खरमास में सूर्य गुरु की राशियों में होता है, जिसे नए आरंभ के लिए कमज़ोर समय माना जाता है। दोनों उत्तर भारत में सबसे कड़ाई से माने जाते हैं; यदि आपका परिवार इन्हें नहीं मानता तो आप ये दिन चिह्न के साथ देख सकते हैं।

क्या अमावस्या या रिक्ता तिथि पर विवाह हो सकता है?

नहीं। अमावस्या और रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी) टाली जाती हैं, और खोजक उनके चलने के घंटों में कभी मुहूर्त नहीं रखता।

क्या यह पुरोहित या कुंडली मिलान का विकल्प है?

नहीं। यह पंचांग से तर्कसंगत शॉर्टलिस्ट देता है। अंतिम मुहूर्त, विशेषकर मुख्य कर्म का लग्न, पुरोहित या ज्योतिषी तय करते हैं जो परिवार की कुंडलियाँ और स्थानीय रीति भी देखते हैं।

मेरे पंचांग में तिथियाँ अलग क्यों हैं?

पंचांग अलग-अलग परंपराओं पर चलते हैं। वे ऋतु संबंधी रोक, भद्रा पूरे दिन को दूषित करती है या केवल उसके घंटों को, गुरु-शुक्र के अस्त की सीमा और क्षेत्रीय रीतियों पर भिन्न होते हैं। यह पृष्ठ अपने पूरे नियम दिखाता है, ताकि आप देख सकें कि कोई तिथि क्यों है या क्यों नहीं।

सबसे अच्छा समय कभी रात में क्यों आता है?

विवाह के लिए खोजक रात के चौघड़िया भी देखता है, क्योंकि कई विवाह शाम को होते हैं। आधी रात के बाद का समय भी उसी हिंदू दिन का है जो सूर्योदय से शुरू हुआ, इसलिए वह उसी तिथि के नीचे दिखता है।

विवाह या घर का मुहूर्त पंचांग और परिवार की कुंडलियों, दोनों से तय करना सबसे अच्छा है। व्यक्तिगत मुहूर्त के लिए परामर्श बुक करें।

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