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अंतिम अपडेट:द्वारा Rahul Arya

केतु कवचम् (केतु स्तोत्रम्) हिंदी लिरिक्स — Ketu स्तोत्र का पाठ

ब्रह्माण्ड पुराण परंपरा का छह श्लोकीय कवच — केतु की कृपा से प्रत्येक अंग की रक्षा। केतु महादशा, आध्यात्मिक मोक्ष और छिपे शत्रुओं से सुरक्षा हेतु पाठ।

केतु कवचम् (केतु स्तोत्रम्) — Ketu Vedic Stotra with lyrics, meaning and benefits

चौपाई 1

केतुं करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम्। प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम्॥

Ketum karalavadanam chitravarnam kiritinam. Pranamami sada ketum dhvajakaram graheshvaram.

करालवदन, चित्रवर्ण, किरीटी, ध्वजाकार, ग्रहेश्वर केतु को सदा प्रणाम।

चौपाई 2

चित्रवर्णः शिरः पातु भालं धूम्रसमद्युतिः। पातु नेत्रे पिङ्गलाक्षः श्रुती मे रक्तलोचनः॥

Chitravarnah shirah patu bhalam dhumrasamadyutih. Patu netre pingalakshah shruti me raktalochana.

चित्रवर्ण शिरः, धूम्रसमद्युति भाल, पिङ्गलाक्ष नेत्र, रक्तलोचन श्रुति की रक्षा।

चौपाई 3

घ्राणं पातु सुवर्णाभश्चिबुकं सिंहिकासुतः। पातु कण्ठं च मे केतुः स्कन्धौ पातु ग्रहाधिपः॥

Ghranam patu suvarnabhashchibukam simhikasutah. Patu kantham cha me ketuh skandhau patu grahadhipah.

सुवर्णाभ घ्राण, सिंहिकासुत चिबुक, केतु कण्ठ, ग्रहाधिप स्कन्ध की रक्षा।

चौपाई 4

हस्तौ पातु सुरश्रेष्ठः कुक्षिं पातु महाग्रहः। सिंहासनः कटिं पातु मध्यं पातु महासुरः॥

Hastau patu surashreshthah kukshim patu mahagrahah. Simhasanah katim patu madhyam patu mahasurah.

सुरश्रेष्ठ हस्त, महाग्रह कुक्षि, सिंहासन कटि, महासुर मध्य की रक्षा।

चौपाई 5

ऊरू पातु महाशीर्षो जानुनी मेऽतिकोपनः। पातु पादौ च मे क्रूरः सर्वाङ्गं नरपिङ्गलः॥

Uru patu mahashirsho januni me-atikopanah. Patu padau cha me kruurah sarvangam narapingalah.

महाशीर्ष ऊरु, अतिकोपन जानु, क्रूर पाद, नरपिङ्गल सर्वांग की रक्षा।

चौपाई 6

य इदं कवचं दिव्यं सर्वरोगविनाशनम्। सर्वशत्रुविनाशं च धारणाद्विजयी भवेत्॥

Ya idam kavacham divyam sarvarogavinashanam. Sarvashatruvinasham cha dharanadvijayi bhavet.

जो यह दिव्य कवच धारण करता है — सर्वरोग और शत्रु नाशक — विजयी होता है।

केतु कवचम् के बारे में

केतु कवचम् हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो केतु को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

  • केतु ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को केतु महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।

पाठ के लाभ

  • केतु महादशा और आध्यात्मिक परिवर्तन में सुरक्षा
  • छिपे शत्रु, दुर्घटना और रहस्यमय पीड़ा से रक्षा
  • भौतिक स्थिरता के साथ मोक्षोन्मुख उपाय
  • प्रतिदिन पाठ से रोग और शत्रु नाश — फलश्रुति

शुभ समय और विधि

मंगलवार या केतु होर में पढ़ें। केतु महादशा में छह श्लोक प्रतिदिन। रंगबिरंगे फूल और कंबल दान करें। विघ्नहरण हेतु गणेश पूजा से जोड़ें।

ज्योतिषीय महत्व

नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतु कवचम् (केतु स्तोत्रम्) क्या है?

ब्रह्माण्ड पुराण परंपरा का छह श्लोकीय कवच — केतु की कृपा से प्रत्येक अंग की रक्षा। केतु महादशा, आध्यात्मिक मोक्ष और छिपे शत्रुओं से सुरक्षा हेतु पाठ।

केतु कवचम् (केतु स्तोत्रम्) का पाठ हिंदी और अंग्रेज़ी में कहाँ पढ़ें?

इस पृष्ठ पर केतु कवचम् (केतु स्तोत्रम्) का पूरा पाठ मूल हिंदी (देवनागरी) में, अंग्रेज़ी लिप्यंतरण और अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ दिया गया है। संयुक्त दृश्य में तीनों साथ दिखते हैं, ताकि आप पढ़ सकें, याद कर सकें और पाठ कर सकें।

केतु कवचम् (केतु स्तोत्रम्) किसे समर्पित है?

केतु कवचम् (केतु स्तोत्रम्) Ketu को समर्पित है। वैदिक ज्योतिष में इसे Ketu से भी जोड़ा जाता है।

मेरी कुंडली के लिए कौन-सा स्तोत्र उचित है?

स्तोत्र और मंत्र पारंपरिक रूप से कुंडली और चल रही दशा के अनुसार चुने जाते हैं। राहुल आर्य के साथ व्यक्तिगत परामर्श में आपकी कुंडली देखकर बताया जाता है कि कौन-सा पाठ आपके लिए उपयुक्त है।

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