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नए घर में प्रवेश की शुभ तिथियाँ, आपके शहर के लिए क्रमवार, हर दिन प्रवेश के समय के साथ। पंचक के घंटे बाहर रखे जाते हैं, और स्थिर लग्न जहाँ आता है वहाँ बताया जाता है।
व्यक्तिगत तिथियाँ (तारा बल और चंद्र बल)
जन्म विवरण भरें या सहेजी कुंडली चुनें, ताकि वे दिन और घंटे हट जाएँ जब चंद्रमा जन्म नक्षत्र से अशुभ तारा में या जन्म राशि से अशुभ भाव में हो। व्यक्तिगत तिथियाँ प्लस और प्रो में मिलती हैं। सामान्य तिथियाँ सबके लिए निःशुल्क हैं।
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13 अक्टू॰ 2026 से 13 जन॰ 2027 तक, New Delhi के लिए
| क्रम | तिथि | अंक | सबसे अच्छा समय | कारण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 14 दिस॰ 2026सोमवार | 85 | 2:50 pm – 5:25 pmअमृत, लाभ | + शुक्ल पंचमी+ श्रवण+ सोमवार+ सर्वार्थ सिद्धि योग |
| 2 | 11 दिस॰ 2026शुक्रवार | 75 | 12:36 pm – 1:16 pmशुभ | + शुक्ल द्वितीया+ शुक्रवार+ अमृत सिद्धि योग |
| 3 | 30 नव॰ 2026सोमवार | 65 | 2:46 pm – 5:23 pmअमृत, लाभ | + सोमवार+ अमृत सिद्धि योग |
| 4 | 26 नव॰ 2026गुरुवार | 60 | 11:47 am – 1:27 pmअभिजित मुहूर्त, लाभ | + गुरुवार |
| 5 | 12 दिस॰ 2026शनिवार | 60 | 8:26 am – 9:39 amशुभ | + शुक्ल तृतीया+ उत्तराषाढ़ा− शनिवार+ अमृत सिद्धि योग |
| 6 | 25 नव॰ 2026बुधवार | 60 | 4:51 pm – 5:24 pmलाभ | − कृष्ण प्रतिपदा+ रोहिणी+ बुधवार+ सर्वार्थ सिद्धि योग |
| 7 | 29 नव॰ 2026रविवार | 50 | 9:31 am – 11:48 amअमृत, लाभ | − रविवार+ अमृत सिद्धि योग+ सर्वार्थ सिद्धि योग+ रवि पुष्य योग |
| 8 | 1 दिस॰ 2026मंगलवार | 50 | 11:07 am – 12:10 pmअभिजित मुहूर्त, लाभ | + मघा− मंगलवार+ अमृत सिद्धि योग |
विवरण
1. 14 दिस॰ 2026, सोमवार · 2:50 pm – 5:25 pm
कारण
- तिथि: शुक्ल पंचमी, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- नक्षत्र: श्रवण, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- वार: सोमवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- योग: व्याघात, किसी सूची में नहीं (0)
- सर्वार्थ सिद्धि योग (+5)
- पंचक लगा है: पंचक का समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
सबसे अच्छा समय: 2:50 pm – 5:25 pm (अमृत, लाभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल पंचमी, धनिष्ठा
अन्य शुभ समय: 7:05 am – 8:22 am (अमृत); 9:50 am – 10:58 am (शुभ)
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: मेष 2:50 pm – 3:33 pm; वृषभ 3:33 pm – 5:25 pm
इस कार्य के लिए स्थिर राशि लग्न पसंद की जाती है: वृषभ 3:33 pm – 5:25 pm
सूर्योदय 7:05 am · सूर्यास्त 5:25 pm
टालें: राहु काल 8:22 am – 9:40 am; यमगंड 10:58 am – 12:15 pm; गुलिक 1:33 pm – 2:50 pm
2. 11 दिस॰ 2026, शुक्रवार · 12:36 pm – 1:16 pm
कारण
- तिथि: शुक्ल द्वितीया, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा, किसी सूची में नहीं (0)
- वार: शुक्रवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- योग: गण्ड, किसी सूची में नहीं (0)
- अमृत सिद्धि योग (+5)
सबसे अच्छा समय: 12:36 pm – 1:16 pm (शुभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल तृतीया, पूर्वाषाढ़ा
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: कुंभ 12:36 pm – 12:44 pm; मीन 12:44 pm – 1:16 pm
सूर्योदय 7:03 am · सूर्यास्त 5:25 pm
टालें: राहु काल 10:56 am – 12:14 pm; यमगंड 2:49 pm – 4:07 pm; गुलिक 8:21 am – 9:38 am
3. 30 नव॰ 2026, सोमवार · 2:46 pm – 5:23 pm
कारण
- तिथि: कृष्ण सप्तमी, किसी सूची में नहीं (0)
- नक्षत्र: आश्लेषा, किसी सूची में नहीं (0)
- वार: सोमवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- योग: इन्द्र, किसी सूची में नहीं (0)
- अमृत सिद्धि योग (+5)
- भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
सबसे अच्छा समय: 2:46 pm – 5:23 pm (अमृत, लाभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण सप्तमी, मघा
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: मीन 2:46 pm – 2:53 pm; मेष 2:53 pm – 4:28 pm; वृषभ 4:28 pm – 5:23 pm
इस कार्य के लिए स्थिर राशि लग्न पसंद की जाती है: वृषभ 4:28 pm – 5:23 pm
सूर्योदय 6:55 am · सूर्यास्त 5:23 pm
टालें: राहु काल 8:13 am – 9:32 am; यमगंड 10:51 am – 12:09 pm; गुलिक 1:28 pm – 2:46 pm
4. 26 नव॰ 2026, गुरुवार · 11:47 am – 1:27 pm
कारण
- तिथि: कृष्ण द्वितीया, किसी सूची में नहीं (0)
- नक्षत्र: मृगशिरा, किसी सूची में नहीं (0)
- वार: गुरुवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- योग: सिद्ध, किसी सूची में नहीं (0)
- भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
सबसे अच्छा समय: 11:47 am – 1:27 pm (अभिजित मुहूर्त, लाभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण द्वितीया, मृगशिरा
अन्य शुभ समय: 4:05 pm – 5:24 pm (शुभ)
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: मकर 11:47 am – 12:16 pm; कुंभ 12:16 pm – 1:27 pm
इस कार्य के लिए स्थिर राशि लग्न पसंद की जाती है: कुंभ 12:16 pm – 1:27 pm
सूर्योदय 6:52 am · सूर्यास्त 5:24 pm
टालें: राहु काल 1:27 pm – 2:46 pm; यमगंड 6:52 am – 8:11 am; गुलिक 9:30 am – 10:49 am
5. 12 दिस॰ 2026, शनिवार · 8:26 am – 9:39 am
कारण
- तिथि: शुक्ल तृतीया, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- वार: शनिवार, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
- योग: वृद्धि, किसी सूची में नहीं (0)
- अमृत सिद्धि योग (+5)
- भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
सबसे अच्छा समय: 8:26 am – 9:39 am (शुभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: शुक्ल तृतीया, उत्तराषाढ़ा
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: धनु 8:26 am – 9:31 am; मकर 9:31 am – 9:39 am
सूर्योदय 7:04 am · सूर्यास्त 5:25 pm
टालें: राहु काल 9:39 am – 10:57 am; यमगंड 1:32 pm – 2:50 pm; गुलिक 7:04 am – 8:21 am
6. 25 नव॰ 2026, बुधवार · 4:51 pm – 5:24 pm
कारण
- तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
- नक्षत्र: रोहिणी, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- वार: बुधवार, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- योग: शिव, किसी सूची में नहीं (0)
- सर्वार्थ सिद्धि योग (+5)
सबसे अच्छा समय: 4:51 pm – 5:24 pm (लाभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण द्वितीया, रोहिणी
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: वृषभ 4:51 pm – 5:24 pm
इस कार्य के लिए स्थिर राशि लग्न पसंद की जाती है: वृषभ 4:51 pm – 5:24 pm
सूर्योदय 6:51 am · सूर्यास्त 5:24 pm
टालें: राहु काल 12:07 pm – 1:27 pm; यमगंड 8:10 am – 9:29 am; गुलिक 10:48 am – 12:07 pm
7. 29 नव॰ 2026, रविवार · 9:31 am – 11:48 am
कारण
- तिथि: कृष्ण षष्ठी, किसी सूची में नहीं (0)
- नक्षत्र: पुष्य, किसी सूची में नहीं (0)
- वार: रविवार, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
- योग: ब्रह्म, किसी सूची में नहीं (0)
- अमृत सिद्धि योग (+5)
- सर्वार्थ सिद्धि योग (+5)
- रवि पुष्य योग (+5)
- भद्रा (विष्टि करण) लगी है: उसका समय मुहूर्त से बाहर रखा गया
सबसे अच्छा समय: 9:31 am – 11:48 am (अमृत, लाभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण षष्ठी, पुष्य
अन्य शुभ समय: 1:27 pm – 2:46 pm (शुभ)
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: धनु 9:31 am – 10:22 am; मकर 10:22 am – 11:48 am
सूर्योदय 6:54 am · सूर्यास्त 5:23 pm
टालें: राहु काल 4:05 pm – 5:23 pm; यमगंड 12:09 pm – 1:27 pm; गुलिक 2:46 pm – 4:05 pm
8. 1 दिस॰ 2026, मंगलवार · 11:07 am – 12:10 pm
कारण
- तिथि: कृष्ण अष्टमी, किसी सूची में नहीं (0)
- नक्षत्र: मघा, इस कार्य के लिए शुभ (+10)
- वार: मंगलवार, इस कार्य के लिए अशुभ (−15)
- योग: वैधृति, किसी सूची में नहीं (0)
- अमृत सिद्धि योग (+5)
सबसे अच्छा समय: 11:07 am – 12:10 pm (अभिजित मुहूर्त, लाभ)
उस समय तिथि और नक्षत्र: कृष्ण अष्टमी, पूर्व फाल्गुनी
सबसे अच्छे समय में उदित लग्न: मकर 11:07 am – 11:56 am; कुंभ 11:56 am – 12:10 pm
सूर्योदय 6:56 am · सूर्यास्त 5:23 pm
टालें: राहु काल 2:46 pm – 4:05 pm; यमगंड 9:33 am – 10:51 am; गुलिक 12:10 pm – 1:28 pm
हटाए गए दिन (85) और कारण
| 13 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास |
|---|---|
| 14 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 15 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास |
| 16 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास |
| 17 अक्टू॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास |
| 18 अक्टू॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 19 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास |
| 20 अक्टू॰ 2026 | अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 21 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 22 अक्टू॰ 2026 | सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 23 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 24 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 25 अक्टू॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 26 अक्टू॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 27 अक्टू॰ 2026 | अंक 20, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; शुक्र अस्त |
| 28 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास; शुक्र अस्त |
| 29 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास; शुक्र अस्त; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 30 अक्टू॰ 2026 | चातुर्मास |
| 31 अक्टू॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास |
| 1 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास |
| 2 नव॰ 2026 | चातुर्मास |
| 3 नव॰ 2026 | अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 4 नव॰ 2026 | चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 5 नव॰ 2026 | सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; चातुर्मास |
| 6 नव॰ 2026 | चातुर्मास |
| 7 नव॰ 2026 | अंक 40, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास |
| 8 नव॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 9 नव॰ 2026 | चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 10 नव॰ 2026 | अंक 20, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 11 नव॰ 2026 | चातुर्मास |
| 12 नव॰ 2026 | चातुर्मास |
| 13 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 14 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास |
| 15 नव॰ 2026 | चातुर्मास |
| 16 नव॰ 2026 | चातुर्मास |
| 17 नव॰ 2026 | चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 18 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 19 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 20 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; चातुर्मास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 21 नव॰ 2026 | राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 22 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं |
| 23 नव॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 24 नव॰ 2026 | अंक 25, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 27 नव॰ 2026 | राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 28 नव॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं |
| 2 दिस॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 3 दिस॰ 2026 | राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 4 दिस॰ 2026 | सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 5 दिस॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं |
| 6 दिस॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं |
| 7 दिस॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 8 दिस॰ 2026 | अंक 30, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 9 दिस॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 10 दिस॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं |
| 13 दिस॰ 2026 | अंक 40, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 15 दिस॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 16 दिस॰ 2026 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 17 दिस॰ 2026 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 18 दिस॰ 2026 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 19 दिस॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 20 दिस॰ 2026 | सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 21 दिस॰ 2026 | खरमास |
| 22 दिस॰ 2026 | खरमास |
| 23 दिस॰ 2026 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 24 दिस॰ 2026 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 25 दिस॰ 2026 | खरमास |
| 26 दिस॰ 2026 | अंक 40, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास |
| 27 दिस॰ 2026 | अंक 25, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 28 दिस॰ 2026 | खरमास |
| 29 दिस॰ 2026 | अंक 35, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास |
| 30 दिस॰ 2026 | खरमास |
| 31 दिस॰ 2026 | खरमास |
| 1 जन॰ 2027 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 2 जन॰ 2027 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 3 जन॰ 2027 | सूर्योदय पर एकादशी, जिसे यह नियम वर्जित करता है; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 4 जन॰ 2027 | खरमास |
| 5 जन॰ 2027 | अंक 40, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास |
| 6 जन॰ 2027 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 7 जन॰ 2027 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 8 जन॰ 2027 | अंक 45, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 9 जन॰ 2027 | खरमास |
| 10 जन॰ 2027 | खरमास |
| 11 जन॰ 2027 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 12 जन॰ 2027 | अंक 20, 50 से कम: अशुभ तिथि, नक्षत्र या वार शुभ बातों पर भारी हैं; खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
| 13 जन॰ 2027 | खरमास; राहु काल, यमगंड, गुलिक, भद्रा और अशुभ तिथि-नक्षत्र हटाने के बाद कोई शुभ समय नहीं बचा |
समय चुने गए स्थान के स्थानीय समय में हैं और मिनट तक पूर्णांकित हैं। ग्रह स्थिति लाहिरी अयनांश से है; सूर्योदय, चौघड़िया और राहु काल लाइब्रेरी के पंचांग से हैं, जो प्रकाशित पंचांगों से कुछ मिनट के भीतर मिलते हैं। इसे शॉर्टलिस्ट मानें: विवाह या गृह प्रवेश के लिए अंतिम मुहूर्त और लग्न अपने पुरोहित से पक्का करें।
इस पृष्ठ पर प्रयुक्त नियम
ये सूचियाँ panchang-ts लाइब्रेरी के इस कार्य के मानक नियम से हैं, जो मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त दर्पण और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र का हवाला देता है। तिथि, नक्षत्र और वार सूर्योदय के समय देखे जाते हैं, जैसा लाइब्रेरी करती है। * चिह्न वाले हमारे सुधार हैं (नीचे देखें)। हर दिन 50 से शुरू होता है। उत्तीर्ण अंक: 50।
| शुभ तिथियाँ (+10) | शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया, शुक्ल पंचमी, शुक्ल षष्ठी, शुक्ल सप्तमी, शुक्ल अष्टमी, शुक्ल एकादशी, शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी |
|---|---|
| अशुभ तिथियाँ (−15) | शुक्ल प्रतिपदा, शुक्ल चतुर्थी, शुक्ल नवमी, शुक्ल दशमी, शुक्ल चतुर्दशी*, पूर्णिमा, कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण चतुर्थी*, कृष्ण नवमी*, कृष्ण चतुर्दशी*, अमावस्या |
| शुभ नक्षत्र (+10) | रोहिणी, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, उत्तर भाद्रपद, रेवती |
| अशुभ नक्षत्र (−15) | कोई नहीं |
| शुभ वार (+10) | सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| अशुभ वार (−15) | रविवार, मंगलवार, शनिवार |
| योग | कोई सूची नहीं; अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि, रवि पुष्य और गुरु पुष्य +5, ज्वालामुखी −10। |
| पूरा दिन वर्जित जब | सूर्योदय पर एकादशी, ग्रहण, अधिक मास |
| शुभ समय से बाहर रखा गया | राहु काल, यमगंड, गुलिक, दुर्मुहूर्त, वर्ज्यम, और वे घंटे जब अशुभ तिथि या नक्षत्र चल रहा हो; भद्रा (विष्टि करण); पंचक. समय इनमें से चुना जाता है: अभिजित मुहूर्त (बुधवार को नहीं) और चौघड़िया अमृत, शुभ, लाभ; केवल दिन में। |
| ऋतु संबंधी रोक (परंपराएँ भिन्न) | खरमास, चातुर्मास, गुरु अस्त, शुक्र अस्त, होलाष्टक, पितृ पक्ष |
| पसंदीदा लग्न | स्थिर राशि |
जहाँ हम लाइब्रेरी से अलग हैं
- रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या सदा अशुभ गिनी जाती हैं। कुछ मानक सूचियाँ इनमें से किसी को शुभ में रखती हैं, जैसे शुक्ल चतुर्दशी, जो परंपरा से अधिक 0 और 1 से गिनती की चूक लगती है। इन्हें * से चिह्नित किया गया है।
- भद्रा: भद्रा का स्पर्श होते ही लाइब्रेरी पूरा दिन हटा देती है, जिससे हमारी जाँच में लगभग 40% दिन हट गए। मुहूर्त चिंतामणि विष्टि करण की अवधि वर्जित करता है, इसलिए हम दिन रखते हैं और भद्रा का समय मुहूर्त से बाहर रखते हैं।
- गंड मूल: जहाँ नियम इसे वर्जित करता है, लाइब्रेरी हर वह दिन हटा देती है जिसके सूर्योदय पर चंद्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में हो, जबकि वही मघा, मूल और रेवती को विवाह के लिए शुभ मानती है। गंड मूल जन्म का नियम है; मुहूर्त में शास्त्र गंडांत संधि टालते हैं, इसलिए हम हर संधि के दोनों ओर एक चरण का समय मुहूर्त से बाहर रखते हैं।
जहाँ परंपराएँ अलग हैं
- खरमास
- सूर्य धनु राशि (लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी) या मीन राशि (लगभग मध्य मार्च से मध्य अप्रैल) में हो, इसे मलमास भी कहते हैं। मुहूर्त चिंतामणि विवाह के लिए इन सौर मासों को नहीं गिनता। उत्तर भारतीय पंचांग खरमास में विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन नहीं रखते। कई दक्षिण भारतीय परिवार यह नियम नहीं मानते; तमिलनाडु में इसके स्थान पर मार्गऴि मास में विवाह टाले जाते हैं।
- चातुर्मास
- देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से प्रबोधिनी या देव उठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) तक के चार महीने, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं। उत्तर भारत में विवाह और गृह प्रवेश देव उठनी एकादशी तक रुकते हैं। दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में श्रावण में विवाह होते हैं और इसकी जगह आडि सौर मास टाला जाता है; विद्या आरंभ के लिए विजयादशमी, जो चातुर्मास में ही आती है, सबसे प्रिय दिन है।
- गुरु अस्त
- गुरु सूर्य से 11 अंश के भीतर हो (सूर्य सिद्धांत की अस्त सीमा) और दिखाई न दे। शास्त्र गुरु अस्त में विवाह, उपनयन और अन्य संस्कार वर्जित मानते हैं। जो पंचांग अस्त का समय दृश्यता से निकालते हैं, उनकी तिथियाँ 11 अंश के नियम से कुछ दिन आगे-पीछे हो सकती हैं, और कुछ दोनों ओर के कुछ दिन (बाल्य और वृद्ध) भी छोड़ते हैं।
- शुक्र अस्त
- शुक्र सूर्य से 10 अंश के भीतर, या वक्री होने पर 8 अंश के भीतर हो। शुक्र विवाह और सुख का कारक है, इसलिए शुक्र अस्त में विवाह और नए घर में प्रवेश टाले जाते हैं। गुरु की तरह दृश्यता पर आधारित पंचांग कुछ दिन अलग हो सकते हैं। कुछ क्षेत्रीय परंपराएँ शुक्र अस्त केवल विवाह के लिए टालती हैं, अन्य संस्कारों के लिए नहीं।
- होलाष्टक
- फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन तक के आठ दिन। मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में माना जाता है। दक्षिण और पूर्व भारत का अधिकांश भाग इसे नहीं मानता।
- पितृ पक्ष
- पितरों को समर्पित कृष्ण पक्ष: उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) पंचांग में आश्विन कृष्ण, अमांत पंचांग में भाद्रपद कृष्ण। दोनों नाम एक ही पक्ष के हैं। कई परिवार इन दिनों वाहन, सोना या घर खरीदना और नया व्यापार शुरू करना टालते हैं। कुछ खरीदारी में कोई रोक नहीं मानते और केवल श्राद्ध कर्म करते हैं।
गृह प्रवेश के तीन प्रकार
- अपूर्व: नए बने या नए खरीदे घर में पहला प्रवेश। पूरे मुहूर्त की आवश्यकता इसी में है।
- सपूर्व: लंबी अनुपस्थिति, जैसे विदेश प्रवास, के बाद घर लौटना।
- द्वंद्व: बड़ी मरम्मत, पुनर्निर्माण या किसी आपदा के बाद फिर प्रवेश।
शास्त्र क्या पसंद करते हैं
मुहूर्त चिंतामणि नए घर में प्रवेश के लिए वैशाख, ज्येष्ठ, माघ और फाल्गुन को सबसे अच्छे मास बताता है, और कई पंचांग कार्तिक और मार्गशीर्ष भी स्वीकार करते हैं। चातुर्मास, खरमास, पितृ पक्ष, होलाष्टक और गुरु या शुक्र का अस्त टाला जाता है, और खोजक ये दिन अपने आप हटा देता है।
शास्त्रीय गृह प्रवेश नक्षत्र मृदु (मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती) और ध्रुव (रोहिणी और तीनों उत्तरा) हैं। लाइब्रेरी की सूची इनमें से अधिकतर रखती है, पर मघा, हस्त, स्वाति और श्रवण भी गिनती है और मृगशिरा व चित्रा छोड़ देती है; पूरी सूची नीचे नियम तालिका में है। पंचक, यानी चंद्रमा का अंतिम पाँच नक्षत्रों से गुज़रना, मुहूर्त से बाहर रखा जाता है, और स्थिर लग्न जैसे वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ पसंद किया जाता है ताकि घर में स्थिरता रहे।
उस दिन
- पहले वास्तु पूजा या गणेश पूजा करें, फिर जल से भरा कलश लेकर पहले दायाँ पैर रखते हुए प्रवेश करें।
- समृद्धि के प्रतीक के रूप में नई रसोई में दूध उबालकर उफनने दें।
- हो सके तो पहली रात घर में कोई अवश्य रहे।
तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं
अवधि का हर दिन पंचांग के उन चार अंगों पर जाँचा जाता है जो मुहूर्त में मायने रखते हैं: तिथि, नक्षत्र, वार और योग, सभी सूर्योदय के समय। हर दिन 50 से शुरू होता है; कार्य की शुभ सूची का अंग 10 जोड़ता है और अशुभ सूची का अंग 15 घटाता है। अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि, रवि पुष्य और गुरु पुष्य 5 जोड़ते हैं, ज्वालामुखी 10 घटाता है। 50 से कम अंक वाले दिन हट जाते हैं, और वे भी जिन्हें नियम सीधे वर्जित करता है, जैसे एकादशी, ग्रहण या अधिक मास।
फिर ऋतु: खरमास, चातुर्मास, गुरु या शुक्र अस्त, होलाष्टक या पितृ पक्ष, जो भी उस कार्य पर लागू हों। इन्हीं पर परंपराएँ सबसे अधिक अलग हैं, इसलिए आप चाहें तो ये दिन छिपाने के बजाय चिह्न के साथ देख सकते हैं।
अंत में समय। बचे हुए हर दिन में चौघड़िया के शुभ खंड और अभिजित मुहूर्त लिए जाते हैं, और उनमें से राहु काल, यमगंड, गुलिक, दुर्मुहूर्त, वर्ज्यम, भद्रा और वे घंटे हटाए जाते हैं जब कोई अशुभ तिथि या नक्षत्र आरंभ हो चुका हो। जो सबसे अच्छा हिस्सा बचे, वही दिखाया गया समय है; अगर कम से कम 24 मिनट न बचें तो दिन हट जाता है। दिनों का क्रम अंक से, फिर समय की गुणवत्ता और लंबाई से तय होता है।
व्यक्तिगत तिथियाँ: तारा बल और चंद्र बल
कोई दिन सामान्य रूप से अच्छा होकर भी किसी एक व्यक्ति के लिए कमज़ोर हो सकता है। मुहूर्त चिंतामणि की दो जाँचें इसे व्यक्तिगत बनाती हैं। तारा बल जन्म नक्षत्र से दिन के नक्षत्र तक गिनकर नौ ताराओं के चक्र में बदलता है; तीसरी (विपत), पाँचवीं (प्रत्यरि) और सातवीं (वध) तारा अशुभ हैं। चंद्र बल में दिन का चंद्रमा जन्म राशि से किस भाव में है, यह देखा जाता है; 1, 3, 6, 7, 10 और 11 भाव शुभ हैं।
व्यक्तिगत मोड केवल वे घंटे रखता है जब दोनों शुभ हों, और जिन दिनों में ऐसा समय न बचे उन्हें हटा देता है। विवाह में शास्त्र वर और वधू दोनों को देखते हैं; दोनों के लिए अलग-अलग चलाएँ और ऐसी तिथि चुनें जो दोनों के लिए शुभ हो। कुछ ग्रंथ शुक्ल पक्ष में चंद्र बल और कृष्ण पक्ष में तारा बल को निर्णायक मानते हैं; हम दोनों को सख़्ती से लागू करते हैं।
गृह प्रवेश मुहूर्त: सामान्य प्रश्न
क्या चातुर्मास में गृह प्रवेश हो सकता है?
पहले प्रवेश (अपूर्व) के लिए अधिकतर उत्तर भारतीय पंचांग मना करते हैं। जिस घर में पहले रह चुके हों उसमें फिर प्रवेश पर नियम नरम हैं। यदि आपका परिवार अनुमति देता है तो चातुर्मास के दिन चिह्न के साथ देख सकते हैं।
गृह प्रवेश में पंचक क्यों टाला जाता है?
पंचक, जब चंद्रमा कुंभ और मीन में हो, परंपरा में छत डालने और घर के काम के लिए टाला जाता है, और कई पंचांग इसे गृह प्रवेश पर भी लागू करते हैं। खोजक पूरा दिन हटाने के बजाय केवल वे घंटे मुहूर्त से बाहर रखता है।
नए घर में प्रवेश के लिए कौन सा लग्न सबसे अच्छा है?
स्थिर राशि: वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ। जब इनमें से कोई सबसे अच्छे समय के भीतर उदित हो, खोजक उसे दिखाता है।
क्या यह पुरोहित का विकल्प है?
नहीं। यह पंचांग से तर्कसंगत शॉर्टलिस्ट देता है। अंतिम मुहूर्त, विशेषकर मुख्य कर्म का लग्न, पुरोहित या ज्योतिषी तय करते हैं जो परिवार की कुंडलियाँ और स्थानीय रीति भी देखते हैं।
मेरे पंचांग में तिथियाँ अलग क्यों हैं?
पंचांग अलग-अलग परंपराओं पर चलते हैं। वे ऋतु संबंधी रोक, भद्रा पूरे दिन को दूषित करती है या केवल उसके घंटों को, गुरु-शुक्र के अस्त की सीमा और क्षेत्रीय रीतियों पर भिन्न होते हैं। यह पृष्ठ अपने पूरे नियम दिखाता है, ताकि आप देख सकें कि कोई तिथि क्यों है या क्यों नहीं।
विवाह या घर का मुहूर्त पंचांग और परिवार की कुंडलियों, दोनों से तय करना सबसे अच्छा है। व्यक्तिगत मुहूर्त के लिए परामर्श बुक करें।
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