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स्तोत्रLakshmiShukra
अंतिम अपडेट:द्वारा Rahul Arya

Mahalakshmi Ashtakam (Laxmi Ashtakam) with Meaning Lyrics — Lakshmi स्तोत्र का पाठ

महालक्ष्मी अष्टकम् (नमस्तेऽस्तु महामाये) का संस्कृत पाठ, हर श्लोक का हिंदी अर्थ, पारंपरिक लाभ और शुक्रवार व दिवाली पर पाठ की विधि।

महालक्ष्मी अष्टकम् (लक्ष्मी अष्टकम्) अर्थ सहित — Lakshmi Vedic Stotra with lyrics, meaning and benefits

चौपाई 1

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Namaste'stu mahamaye shripithe surapujite. Shankha-chakra-gada-haste mahalakshmi namo'stu te.

हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान और देवताओं से पूजित देवी, आपको नमस्कार है। हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 2

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Namaste garudarudhe kolasura-bhayankari. Sarva-papa-hare devi mahalakshmi namo'stu te.

गरुड़ पर सवार और कोलासुर को भय देने वाली देवी, आपको नमस्कार है। सब पापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 3

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि। सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Sarvajne sarva-varade sarva-dushta-bhayankari. Sarva-duhkha-hare devi mahalakshmi namo'stu te.

आप सब कुछ जानने वाली, सबको वर देने वाली और सभी दुष्टों को भय देने वाली हैं। सब दुखों को दूर करने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 4

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Siddhi-buddhi-prade devi bhukti-mukti-pradayini. Mantra-murte sada devi mahalakshmi namo'stu te.

आप सिद्धि और बुद्धि देने वाली, सांसारिक सुख (भुक्ति) और मोक्ष (मुक्ति) दोनों प्रदान करने वाली हैं। सदा मंत्र-स्वरूपा देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 5

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि। योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Adyanta-rahite devi adya-shakti-maheshvari. Yogaje yoga-sambhute mahalakshmi namo'stu te.

आपका न आदि है न अंत; आप आदिशक्ति और महेश्वरी हैं। योग से प्रकट होने वाली और योग से उत्पन्न देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 6

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे। महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Sthula-sukshma-maharaudre mahashakti mahodare. Maha-papa-hare devi mahalakshmi namo'stu te.

आप स्थूल भी हैं और सूक्ष्म भी, और अत्यंत उग्र रूप भी आपका ही है। महाशक्ति, जिनके उदर में यह सारा जगत समाया है, बड़े-बड़े पापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 7

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि। परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Padmasana-sthite devi parabrahma-svarupini. Parameshi jaganmatar mahalakshmi namo'stu te.

कमल के आसन पर विराजमान, परब्रह्म-स्वरूपिणी देवी, आप परमेश्वरी और जगत की माता हैं। महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 8

श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते। जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

Shvetambara-dhare devi nanalankara-bhushite. Jagat-sthite jaganmatar mahalakshmi namo'stu te.

श्वेत वस्त्र धारण करने वाली और अनेक आभूषणों से सजी देवी, आप पूरे जगत में व्याप्त हैं और जगत की माता हैं। महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

चौपाई 9

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः। सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥

Mahalakshmyashtakam stotram yah pathed bhaktiman narah. Sarva-siddhim avapnoti rajyam prapnoti sarvada.

फलश्रुति: जो भक्त श्रद्धा से इस महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्र का पाठ करता है, उसे सब सिद्धियाँ और सदा उच्च पद प्राप्त होता है, ऐसा कहा गया है।

चौपाई 10

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्। द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः॥

Ekakale pathen nityam maha-papa-vinashanam. Dvikalam yah pathen nityam dhana-dhanya-samanvitah.

प्रतिदिन एक बार पाठ करने से बड़े पापों का नाश होता है, और जो प्रतिदिन दो बार पाठ करता है वह धन-धान्य से संपन्न होता है, ऐसी मान्यता है।

चौपाई 11

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्। महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा॥

Trikalam yah pathen nityam maha-shatru-vinashanam. Mahalakshmir bhaven nityam prasanna varada shubha.

जो प्रतिदिन तीनों समय पाठ करता है, उसके बड़े शत्रुओं का नाश बताया गया है, और महालक्ष्मी उस पर सदा प्रसन्न, वरदायिनी और मंगलकारी रहती हैं।

लक्ष्मी अष्टकम्: इन्द्रकृत महालक्ष्मी अष्टकम्

ज़्यादातर लोग जिस लक्ष्मी अष्टकम् को खोजते हैं, वह महालक्ष्मी अष्टकम् है, जो "नमस्तेऽस्तु महामाये" से शुरू होता है। इसमें माँ महालक्ष्मी की स्तुति के आठ श्लोक हैं और अंत में तीन श्लोकों की फलश्रुति है, जो पाठ का फल बताती है। स्तोत्र "इन्द्र उवाच" (इन्द्र ने कहा) से आरंभ होता है; परंपरा के अनुसार इसके रचयिता देवराज इन्द्र हैं और इसे पद्म पुराण से माना जाता है।

हर श्लोक एक ही टेक पर समाप्त होता है, "महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते", यानी "हे महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।" ऊपर पूरा संस्कृत पाठ, सरल लिप्यंतरण और हर श्लोक का हिंदी अर्थ दिया गया है। नीचे स्तोत्र का भाव और पाठ की विधि है, ख़ासकर शुक्रवार और दिवाली के लिए।

एक ज़रूरी बात: "लक्ष्मी अष्टकम्" नाम से एक और, अलग स्तोत्र भी है, जो "यस्याः कटाक्षमात्रेण" से शुरू होता है। अगर आप वह खोज रहे थे, तो हमारा लक्ष्मी अष्टकम् (यस्याः कटाक्ष) पेज देखें।

महालक्ष्मी अष्टकम् में क्या कहा गया है

आठ श्लोक माँ लक्ष्मी के परिचित रूप से शुरू होकर उनके विराट रूप तक पहुँचते हैं।

  • श्लोक 1 से 3 में उन्हें महामाया कहा गया है, जो श्रीपीठ पर विराजमान हैं और शंख, चक्र व गदा धारण करती हैं। वे गरुड़ पर सवार हैं, कोलासुर को भय देने वाली हैं, सर्वज्ञ हैं और पाप व दुख हरती हैं।
  • श्लोक 4 और 5 में वे सिद्धि, बुद्धि, भुक्ति (सांसारिक सुख) और मुक्ति (मोक्ष) देने वाली हैं। वे मंत्र-स्वरूपा हैं, आदि और अंत से रहित, स्वयं आदिशक्ति।
  • श्लोक 6 से 8 दृष्टि को और विस्तार देते हैं। वे स्थूल भी हैं और सूक्ष्म भी, कमल के आसन पर विराजमान, परब्रह्म-स्वरूपिणी, श्वेत वस्त्रधारी और पूरे जगत में व्याप्त जगन्माता।

यानी यह स्तोत्र केवल धन की प्रार्थना नहीं है। इसमें लक्ष्मी जी की स्तुति उस शक्ति के रूप में है जो व्यवस्था, बुद्धि, कल्याण और अंततः मुक्ति का आधार है।

लक्ष्मी अष्टकम् के लाभ: परंपरा क्या कहती है

फलश्रुति (श्लोक 9 से 11) स्तोत्र का अपना फल-कथन है। इसके अनुसार श्रद्धा से पाठ करने वाले को सिद्धि और स्थायी प्रतिष्ठा मिलती है; प्रतिदिन एक बार पाठ से बड़े पापों का नाश, दो बार पाठ से धन-धान्य, और तीन बार पाठ से बड़े शत्रुओं पर विजय बताई गई है।

मैं इन पंक्तियों को उस कृपा का वर्णन मानता हूँ जिसका यह स्तोत्र आह्वान करता है, कोई गारंटी नहीं। मेरे अनुभव में जो लोग नियमित पाठ करते हैं, वे अचानक धन-लाभ से ज़्यादा इन बातों का ज़िक्र करते हैं:

  • पैसे और घर के प्रति ज़्यादा शांत और कृतज्ञ भाव
  • एक स्थिर दिनचर्या, क्योंकि रोज़ का नियम अपने आप अनुशासन लाता है
  • लक्ष्मी जी के प्रति भक्ति, केवल धन की देवी के रूप में नहीं, बल्कि व्यवस्था, सौंदर्य और कल्याण की देवी के रूप में

वैदिक ज्योतिष में लक्ष्मी उपासना को परंपरागत रूप से शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है, जिसका दिन शुक्रवार है। इसीलिए पाठ शुरू करने के लिए शुक्रवार सबसे प्रचलित दिन है। स्तोत्र पाठ एक भक्ति साधना है; यह आर्थिक योजना या विशेषज्ञ सलाह का विकल्प नहीं है।

लक्ष्मी अष्टकम् पाठ विधि

बड़े अनुष्ठान की ज़रूरत नहीं है। सच्चे मन से नियमित पाठ ज़्यादा मायने रखता है।

  1. दिन चुनें: शुक्रवार पारंपरिक है। नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली पर भी बहुत लोग रोज़ पाठ करते हैं।
  2. समय चुनें: सुबह स्नान के बाद सबसे अच्छा है। शाम को सूर्यास्त के समय दीपक जलाने के बाद भी पाठ कर सकते हैं।
  3. छोटा पूजा स्थान: महालक्ष्मी का चित्र या मूर्ति रखें, घी या तेल का दीपक जलाएँ, और फूल (कमल या लाल फूल मिले तो) तथा मिठाई या खीर अर्पित करें।
  4. मन शांत करें: पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें, कुछ गहरी साँसें लें और गणेश जी का स्मरण करें।
  5. आठ श्लोक और फलश्रुति पढ़ें: धीरे और स्पष्ट पढ़ें। गति से ज़्यादा अर्थ समझना ज़रूरी है।
  6. संख्या तय करें: फलश्रुति में दिन में एक, दो या तीन बार पाठ का उल्लेख है। एक बार से शुरू करें और उसे नियम से निभाएँ। निरंतरता बड़ी संख्या से ज़्यादा मायने रखती है।
  7. कृतज्ञता के साथ समापन: प्रणाम करें, प्रसाद परिवार में बाँटें, और सुरक्षित हो तो दीपक कुछ देर जलने दें।

स्त्री और पुरुष दोनों यह स्तोत्र पढ़ सकते हैं। मासिक धर्म के दिनों में परिवारों की परंपराएँ अलग होती हैं; अपने परिवार की रीति मानें, या चाहें तो उन दिनों पाठ मन में सुनें।

दिवाली पर लक्ष्मी अष्टकम् का पाठ

दिवाली के लक्ष्मी पूजन में महालक्ष्मी अष्टकम् स्वाभाविक रूप से जुड़ता है। मुख्य पूजन के बाद और आरती से पहले इसका पाठ करें।

2026 में दिवाली का लक्ष्मी पूजन रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजन मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है, जब प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न साथ होते हैं। शहर के अनुसार समय बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें। पाँचों दिन का पूरा कैलेंडर मेरे लेख 2026 में दिवाली कब है में है।

दिवाली की पूजा को और पूर्ण बनाना हो, तो इस संस्कृत स्तोत्र के साथ हिंदी की लक्ष्मी चालीसा भी पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महालक्ष्मी अष्टकम् की रचना किसने की?

परंपरा के अनुसार महालक्ष्मी अष्टकम् की रचना देवराज इन्द्र ने की, और स्तोत्र स्वयं "इन्द्र उवाच" (इन्द्र ने कहा) से शुरू होता है। इसे पारंपरिक रूप से पद्म पुराण से माना जाता है।

लक्ष्मी अष्टकम् का पाठ किस समय करें?

सुबह स्नान के बाद का समय सबसे अच्छा है, और शाम को सूर्यास्त पर दीपक जलाने के बाद पाठ भी पारंपरिक है। शुक्रवार, दिवाली का लक्ष्मी पूजन और नवरात्रि के दिन विशेष रूप से प्रचलित हैं।

महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ कितनी बार करें?

फलश्रुति में दिन में एक, दो या तीन बार पाठ का उल्लेख है और हर एक का पारंपरिक फल बताया गया है। मेरा सुझाव है कि दिन में एक बार से शुरू करें और उस नियम को स्थिर रखने के बाद ही संख्या बढ़ाएँ।

क्या स्त्री और पुरुष दोनों लक्ष्मी अष्टकम् पढ़ सकते हैं?

हाँ, कोई भी व्यक्ति, किसी भी आयु या लिंग का, श्रद्धा से महालक्ष्मी अष्टकम् का पाठ कर सकता है। मासिक धर्म जैसी विशेष स्थितियों में अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।

शुक्रवार को पाठ करने के क्या लाभ हैं?

शुक्रवार परंपरागत रूप से माँ लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा है, इसलिए भक्त इसे इस स्तोत्र के लिए सबसे उपयुक्त दिन मानते हैं। जो लोग शुक्रवार का नियम रखते हैं, वे अक्सर पैसे और घर के प्रति ज़्यादा शांत और कृतज्ञ दृष्टि की बात करते हैं, हालाँकि किसी निश्चित फल की गारंटी नहीं है।

शुक्रवार से शुरुआत करें

लक्ष्मी अष्टकम् इतना छोटा है कि कुछ ही हफ़्तों में याद हो जाता है, और इतना गहरा कि जीवन भर साथ रहता है। किसी शुक्रवार से शुरू करें, विधि सरल रखें, और पाठ करते हुए हर श्लोक के अर्थ को मन में उतरने दें।

यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी जन्म कुंडली के अनुसार कौन-से स्तोत्र या उपाय उपयुक्त हैं, ख़ासकर शुक्र और आर्थिक स्थिति को लेकर, तो मुझसे परामर्श बुक करें।

महालक्ष्मी अष्टकम् (लक्ष्मी अष्टकम्) अर्थ सहित किन पर्वों में पढ़ा जाता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महालक्ष्मी अष्टकम् (लक्ष्मी अष्टकम्) अर्थ सहित क्या है?

महालक्ष्मी अष्टकम् (नमस्तेऽस्तु महामाये) का संस्कृत पाठ, हर श्लोक का हिंदी अर्थ, पारंपरिक लाभ और शुक्रवार व दिवाली पर पाठ की विधि।

महालक्ष्मी अष्टकम् (लक्ष्मी अष्टकम्) अर्थ सहित का पाठ हिंदी और अंग्रेज़ी में कहाँ पढ़ें?

इस पृष्ठ पर महालक्ष्मी अष्टकम् (लक्ष्मी अष्टकम्) अर्थ सहित का पूरा पाठ मूल हिंदी (देवनागरी) में, अंग्रेज़ी लिप्यंतरण और अंग्रेज़ी अनुवाद के साथ दिया गया है। संयुक्त दृश्य में तीनों साथ दिखते हैं, ताकि आप पढ़ सकें, याद कर सकें और पाठ कर सकें।

महालक्ष्मी अष्टकम् (लक्ष्मी अष्टकम्) अर्थ सहित किसे समर्पित है?

महालक्ष्मी अष्टकम् (लक्ष्मी अष्टकम्) अर्थ सहित Lakshmi को समर्पित है। वैदिक ज्योतिष में इसे Shukra से भी जोड़ा जाता है।

मेरी कुंडली के लिए कौन-सा स्तोत्र उचित है?

स्तोत्र और मंत्र पारंपरिक रूप से कुंडली और चल रही दशा के अनुसार चुने जाते हैं। राहुल आर्य के साथ व्यक्तिगत परामर्श में आपकी कुंडली देखकर बताया जाता है कि कौन-सा पाठ आपके लिए उपयुक्त है।

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