पंचांग की व्याख्या: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण, और इन्हें कैसे पढ़ें
पंचांग क्या है, और इसके पाँच अंग कौन-से हैं?
पंचांग पाँच दैनिक तत्वों का हिंदू पंचांग है: तिथि (चंद्र दिन, चंद्र-सूर्य के बीच हर 12 अंश का अंतर), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का पड़ाव, 27 में से एक), योग (सूर्य और चंद्र के संयुक्त अंशों के 27 भागों में से एक) और करण (आधी तिथि, 11 नामों में से)। ये मिलकर "दिन की गुणवत्ता" बताते हैं और त्योहारों की तिथियाँ, व्रत, अनुष्ठान और मुहूर्त चुनने में काम आते हैं।
शब्द संस्कृत से आता है: पंच का अर्थ पाँच और अंग का अर्थ अंग। अगर आपने कभी पंचांग देखकर शब्दों और समयों में खोया हुआ महसूस किया है, तो यह गाइड उसे तोड़कर समझाती है। किसी भी शहर के आज के मान हमारे पंचांग पेज पर देखें।
एक नज़र में पाँच अंग
| अंग | यह क्या है | कितने |
|---|---|---|
| तिथि | चंद्र दिन, चंद्र-सूर्य की दूरी पर आधारित | चंद्र मास में 30 |
| वार | सप्ताह का दिन | 7 |
| नक्षत्र | वह चंद्र पड़ाव जिसमें चंद्रमा है | 27 |
| योग | सूर्य और चंद्र की स्थितियों के जोड़ पर आधारित विभाजन | 27 |
| करण | तिथि का आधा | 11 प्रकार |
1. तिथि क्या है: चंद्र दिन कैसे मापा जाता है?
तिथि वह समय है जो चंद्रमा को सूर्य पर 12 अंश की बढ़त लेने में लगता है। क्योंकि पूरा चक्र 360 अंश है, एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं।
महीना 15-15 तिथियों के दो हिस्सों में बँटा है:
- शुक्ल पक्ष (उजला पक्ष): अमावस्या से पूर्णिमा तक। चंद्रमा बढ़ता है।
- कृष्ण पक्ष (अँधेरा पक्ष): पूर्णिमा से वापस अमावस्या तक। चंद्रमा घटता है।
नाम हर पक्ष में दोहराते हैं: प्रतिपदा (पहली), द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, और फिर शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा या कृष्ण पक्ष में अमावस्या।
तिथियाँ कैलेंडर के दिनों से क्यों नहीं मिलतीं: तिथियों की लंबाई लगभग 19 से 26 घंटे के बीच बदलती है, क्योंकि चंद्रमा की गति बदलती है। तिथि दिन के किसी भी समय शुरू और खत्म हो सकती है, और कभी-कभी कोई तिथि कैलेंडर तिथियों में छूट जाती है या दोहराती है। इसीलिए त्योहार की तिथियाँ कभी-कभी क्षेत्रों के बीच अलग होती हैं।
यह क्यों मायने रखती है: कई व्रत और त्योहार तिथि से जुड़े हैं, जैसे एकादशी, चतुर्थी, अष्टमी और पूर्णिमा। अमावस्या पूर्वजों के संस्कारों के लिए इस्तेमाल होती है, जैसे पितृ दोष में। साल की एकादशी तिथियाँ हमारे एकादशी पेज पर और मुख्य त्योहार त्योहार कैलेंडर में हैं।
2. वार: सप्ताह का दिन
सात वारों में से हर एक का एक ग्रह स्वामी है:
| वार | दिन | स्वामी ग्रह |
|---|---|---|
| रविवार | रविवार | सूर्य |
| सोमवार | सोमवार | चंद्र |
| मंगलवार | मंगलवार | मंगल |
| बुधवार | बुधवार | बुध |
| गुरुवार | गुरुवार | गुरु |
| शुक्रवार | शुक्रवार | शुक्र |
| शनिवार | शनिवार | शनि |
हिंदू पंचांग में, दिन परंपरा से सूर्योदय पर शुरू होता है, आधी रात पर नहीं। जब कोई घटना तड़के के घंटों में पड़े तो यह मायने रखता है।
हर दिन विशेष प्रार्थनाओं और अभ्यासों से जुड़ा है, जैसे मंगलवार हनुमान के लिए और शनिवार शनि के लिए। देखें ग्रह स्तोत्र गाइड।
3. नक्षत्र: चंद्रमा का पड़ाव
नक्षत्र वह तारा-समूह है जिससे चंद्रमा उस दिन गुज़र रहा है। 27 हैं, हर एक 13 अंश 20 कला चौड़ा, और चंद्रमा हर एक में लगभग एक दिन रहता है। जन्म के समय आपका चंद्रमा किस नक्षत्र में था, यह नक्षत्र खोजक से देखें। नक्षत्र मुहूर्त, नामकरण और कई अनुष्ठानों के लिए इस्तेमाल होता है। पूरी सूची और अर्थ के लिए वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्र पढ़ें।
4. योग: सूर्य-चंद्र संयोजन
यहाँ योग शारीरिक अभ्यास नहीं है। यह एक गणना किया हुआ माप है: सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त अंशों को 13 अंश 20 कला के 27 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है, और हर हिस्से का एक नाम है। 27 के उदाहरण हैं विष्कंभ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सिद्धि, शिव, सिद्ध, शुक्ल, ब्रह्म और इंद्र, वैधृति तक। क्रम से 27 योग हैं: विष्कुंभ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगंड, सुकर्मा, धृति, शूल, गंड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इंद्र और वैधृति।
कुछ योग शुभ माने जाते हैं, और कुछ, जैसे व्यतीपात और वैधृति, परंपरा से शुरुआत के लिए टाले जाते हैं। शुभ लगने वाला नाम अपने आप दिन को शुभ नहीं बना देता, और योग को तिथि तथा नक्षत्र के साथ पढ़ा जाता है।
5. करण: आधी तिथि
करण तिथि का आधा है, यानी चंद्र-सूर्य की दूरी के 6 अंश। एक चंद्र मास में 60 करण होते हैं, जो 11 नामों से लिए गए हैं:
- सात दोहराने वाले (चर) करण: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि (भद्रा)।
- चार स्थिर करण: शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न, जो अमावस्या के पास एक-एक बार आते हैं।
विष्टि (भद्रा) वह करण है जो शुभ कार्यों के लिए सबसे ज़्यादा टाला जाता है। देखें मुहूर्त गाइड।
पंचांग में दिखने वाली दूसरी बातें
- आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय, जो हर दिन की शुरुआत तय करते हैं।
- चंद्रोदय और चंद्रास्त के समय।
- राहु काल, यमगंड और गुलिक काल, रोज़ की खिड़कियाँ जिनसे कुछ लोग नई शुरुआत के लिए बचते हैं। हमारी राहु उपाय गाइड की तालिका देखें।
- अभिजित मुहूर्त, स्थानीय मध्याह्न के आसपास की शुभ खिड़की।
- हिंदू मास और पक्ष, और क्षेत्रीय कैलेंडरों में वर्ष, जैसे विक्रम संवत या शक संवत।
- त्योहार और व्रत के दिन।
पंचांग अलग क्यों होते हैं?
कई चीज़ें क्षेत्रीय अंतर पैदा करती हैं:
- स्थान। सूर्योदय, और इसलिए किसी दिन की तिथि, शहरों के बीच अलग होती है। अपने स्थान का पंचांग इस्तेमाल करें।
- अमांत बनाम पूर्णिमांत। कुछ क्षेत्रों में चंद्र मास अमावस्या पर खत्म होता है (अमांत), दूसरों में पूर्णिमा पर (पूर्णिमांत)। यह कृष्ण पक्ष के लिए मास के नाम खिसका देता है।
- गणना की पद्धति। अलग-अलग पंचांग थोड़ी अलग पद्धतियाँ और अयनांश सेटिंग इस्तेमाल करते हैं।
- त्योहार के लिए कौन सी तिथि "गिनी" जाती है। नियम अलग हैं, जैसे सूर्योदय, मध्याह्न या रात में कौन सी तिथि प्रबल है।
इसलिए अगर दो स्रोत किसी त्योहार की तिथि पर असहमत हों, तो यह आमतौर पर पद्धति का अंतर है, गलती नहीं। अपने परिवार या स्थानीय परंपरा का पालन करें।
रोज़ का पंचांग कैसे पढ़ें?
- अपने शहर और आज की तारीख का पंचांग खोलें।
- तिथि और उसके समाप्त होने का समय देखें।
- नक्षत्र और वह कब बदलता है, यह देखें।
- सूर्योदय और सूर्यास्त और दिन की टालने वाली खिड़कियाँ जैसे राहु काल जाँचें।
- त्योहार, व्रत और विशेष योग खोजें।
- अगर आप कुछ महत्वपूर्ण योजना बना रहे हैं, तो हमारी मुहूर्त गाइड का पालन करें।
पंचांग पेज पर आप शहर बदल सकते हैं, ताकि सूर्योदय आधारित मान आपके स्थान से मेल खाएँ।
पंचांग और आपकी अपनी कुंडली
पंचांग आज का आकाश बताता है, जो एक शहर में सबके लिए एक जैसा है। आपकी जन्म कुंडली आपके जन्म के समय का आकाश बताती है, जो निजी है। वे संबंधित हैं, जैसे आपका जन्म नक्षत्र और तिथि आपकी कुंडली में सूचीबद्ध हैं, पर वे अलग सवालों का जवाब देते हैं। अभी का आकाश आपसे कैसे जुड़ता है, यह देखने के लिए आपको अपनी कुंडली चाहिए: अपनी चंद्र राशि चंद्र राशि कैलकुलेटर से और लग्न मुफ़्त कुंडली से पता करें, और शब्द नया हो तो लग्न गाइड पढ़ें।
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यह लेख सामान्य पैटर्न बताता है। एक केंद्रित रीडिंग इसे आपके सटीक ग्रह स्थिति, वर्तमान दशा और आपके वास्तविक प्रश्न पर लागू करती है।
परामर्श बुक करेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंचांग के पाँच अंग क्या हैं?
तिथि (चंद्र दिन), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग (सूर्य-चंद्र का संयोजन) और करण (आधी तिथि)।
पंचांग में कितनी तिथियाँ, योग और करण होते हैं?
एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ (हर पक्ष में 15), 27 योग, 27 नक्षत्र, और 11 नामों से बने 60 करण (7 दोहराने वाले और 4 स्थिर) होते हैं।
एक तिथि कितनी लंबी होती है?
यह लगभग 19 से 26 घंटे तक बदलती है, क्योंकि चंद्रमा की गति बदलती है। तिथि वह समय है जो चंद्रमा को सूर्य पर 12 अंश की बढ़त लेने में लगता है।
हिंदू दिन सूर्योदय से क्यों शुरू होता है?
पारंपरिक पंचांग में हर दिन सूर्योदय पर शुरू होता है, इसलिए दिन के लिए सूर्योदय पर प्रबल वार और तिथि का इस्तेमाल होता है।
त्योहार की तिथियाँ क्षेत्रों के बीच अलग क्यों होती हैं?
क्योंकि तिथियाँ कैलेंडर के दिनों से नहीं मिलतीं, और क्षेत्र अलग नियम, स्थान और गणना पद्धतियाँ इस्तेमाल करते हैं।
क्या पंचांग का योग योगासन जैसा ही है?
नहीं। पंचांग में योग सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त स्थिति पर आधारित 27 भागों का गणना किया हुआ विभाजन है।
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