पंचांग कैलेंडर

संक्रांति और चंद्र कलाएँ 2027

पूरा वर्ष एक नज़र में: सूर्य हर निरयन राशि में कब प्रवेश करता है, और हर अमावस्या, पूर्णिमा और अर्ध चंद्र कब पड़ता है, लाहिरी अयनांश से। दिन की तिथि, नक्षत्र, राहु काल और मुहूर्त के लिए आज का पंचांग देखें।

संक्रांति तिथियाँ 2027

सूर्य के हर निरयन राशि में प्रवेश का क्षण (लाहिरी), भारतीय मानक समय में। प्रवेश दिन में देर से हो तो पर्व का पुण्य काल प्रायः अगली सुबह माना जाता है, इसलिए कुछ पंचांग अगली तिथि छापते हैं।

संक्रांतितारीख़समय (IST)
मकर संक्रांतिगुरु, 14 जन॰09:00 pm
कुंभ संक्रांतिशनि, 13 फ़र॰09:59 am
मीन संक्रांतिसोम, 15 मार्च06:49 am
मेष संक्रांति (बैसाखी, विशु, पुथांडु)बुध, 14 अप्रैल03:18 pm
वृषभ संक्रांतिशनि, 15 मई12:09 pm
मिथुन संक्रांतिमंगल, 15 जून06:44 pm
कर्क संक्रांति (दक्षिणायन)शनि, 17 जुल॰05:37 am
सिंह संक्रांतिमंगल, 17 अग॰02:01 pm
कन्या संक्रांतिशुक्र, 17 सित॰01:59 pm
तुला संक्रांतिसोम, 18 अक्टू॰01:58 am
वृश्चिक संक्रांतिबुध, 17 नव॰01:48 am
धनु संक्रांतिगुरु, 16 दिस॰04:28 pm

चंद्र कला कैलेंडर 2027

हर महीने की अमावस्या, शुक्ल अष्टमी के आसपास का अर्ध चंद्र, पूर्णिमा और कृष्ण अष्टमी के आसपास का अर्ध चंद्र, भारतीय मानक समय में। ये सटीक खगोलीय क्षण हैं; तिथि के रूप में अमावस्या और पूर्णिमा इनके आसपास लगभग एक दिन रहती हैं।

महीनाअमावस्याशुक्ल पक्ष अर्ध चंद्रपूर्णिमाकृष्ण पक्ष अर्ध चंद्र
जनवरीशुक्र, 8 जन॰, 01:55 amशनि, 16 जन॰, 02:05 amशुक्र, 22 जन॰, 05:47 pmशुक्र, 29 जन॰, 04:26 pm
फ़रवरीशनि, 6 फ़र॰, 09:26 pmरवि, 14 फ़र॰, 01:29 pmरवि, 21 फ़र॰, 04:54 amरवि, 28 फ़र॰, 10:47 am
मार्चसोम, 8 मार्च, 03:00 pmसोम, 15 मार्च, 09:55 pmसोम, 22 मार्च, 04:14 pmमंगल, 30 मार्च, 06:24 am
अप्रैलबुध, 7 अप्रैल, 05:21 amबुध, 14 अप्रैल, 04:27 amबुध, 21 अप्रैल, 03:57 amगुरु, 29 अप्रैल, 01:48 am
मईगुरु, 6 मई, 04:29 pmगुरु, 13 मई, 10:14 amगुरु, 20 मई, 04:29 pmशुक्र, 28 मई, 07:28 pm
जूनशनि, 5 जून, 01:10 amशुक्र, 11 जून, 04:26 pmशनि, 19 जून, 06:15 amरवि, 27 जून, 10:24 am
जुलाईरवि, 4 जुल॰, 08:32 amरवि, 11 जुल॰, 12:09 amरवि, 18 जुल॰, 09:15 pmसोम, 26 जुल॰, 10:25 pm
अगस्तसोम, 2 अग॰, 03:35 pmमंगल, 31 अग॰, 11:11 pmसोम, 9 अग॰, 10:24 amमंगल, 17 अग॰, 12:59 pmबुध, 25 अग॰, 07:57 am
सितंबरगुरु, 30 सित॰, 08:06 amबुध, 8 सित॰, 12:01 amगुरु, 16 सित॰, 04:34 amगुरु, 23 सित॰, 03:51 pm
अक्टूबरशुक्र, 29 अक्टू॰, 07:07 pmगुरु, 7 अक्टू॰, 05:18 pmशुक्र, 15 अक्टू॰, 07:17 pmशुक्र, 22 अक्टू॰, 10:59 pm
नवंबररवि, 28 नव॰, 08:54 amशनि, 6 नव॰, 01:30 pmरवि, 14 नव॰, 08:56 amरवि, 21 नव॰, 06:18 am
दिसंबरमंगल, 28 दिस॰, 01:42 amसोम, 6 दिस॰, 10:52 amसोम, 13 दिस॰, 09:39 pmसोम, 20 दिस॰, 02:41 pm

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संक्रांति क्या है?

वह क्षण जब सूर्य किसी नई निरयन राशि में प्रवेश करता है। वर्ष में बारह संक्रांतियाँ होती हैं। जनवरी के मध्य में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश वाली मकर संक्रांति सबसे प्रसिद्ध है, और अप्रैल की मेष संक्रांति कई क्षेत्रों में सौर नववर्ष होती है।

मेरे कैलेंडर में संक्रांति एक दिन बाद क्यों दिखती है?

जब सूर्य का प्रवेश दिन में देर से होता है, तो कई पंचांग पर्व का पुण्य काल अगली सुबह मानते हैं और वही तारीख़ छापते हैं। यह पृष्ठ प्रवेश का क्षण ही, उसके समय के साथ, देता है।

क्या ये समय भारत के बाहर भी मान्य हैं?

ये क्षण हर जगह एक ही हैं; यहाँ समय भारतीय मानक समय में है। इन्हें अपने समय क्षेत्र में बदल लें, और ध्यान रखें कि आधी रात के पास की घटना आपके यहाँ दूसरी तारीख़ पर पड़ सकती है।

किसी संक्रांति, पूर्णिमा या अमावस्या के आसपास कुछ योजना बना रहे हैं? परामर्श में तिथियों को आपकी अपनी कुंडली से मिलाकर देखा जाता है।

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