वार्षिक गोचर कैलेंडर
शुक्र गोचर 1952 | गोचर तिथियाँ
1952 में शुक्र के सटीक राशि प्रवेश और निकास समय। अध्ययन और योजना के लिए लाहिरी सायन गोचर।
1952 में शुक्र 15 बार राशि बदलता है, लगभग हर 24 दिन में। वर्ष की शुरुआत वृश्चिक में और अंत कुंभ में होता है।
सटीक समय नीचे की तालिका में है।
New Delhi · अयनांश (लाहिरी) · राहु/केतु: सत्य चंद्र पात
| प्रवेश | समय |
|---|---|
| धनुवृश्चिक से | |
| मकरधनु से | |
| कुंभमकर से | |
| मीनकुंभ से | |
| मेषमीन से | |
| वृषभमेष से | |
| मिथुनवृषभ से | |
| कर्कमिथुन से | |
| सिंहकर्क से | |
| कन्यासिंह से | |
| तुलाकन्या से | |
| वृश्चिकतुला से | |
| धनुवृश्चिक से | |
| मकरधनु से | |
| कुंभमकर से |
1952 में शुक्र का गोचर: मुख्य बातें
- 1952 में शुक्र कुल 15 बार राशि बदलता है। पहला प्रवेश मंगलवार, 22 जनवरी 1952 को वृश्चिक से धनु में है, और अंतिम मंगलवार, 30 दिसंबर 1952 को कुंभ में।
- इस वर्ष सबसे लंबा ठहराव धनु राशि में लगभग 25 दिन का है।
- सबसे छोटा पूरा ठहराव मकर में लगभग 24 दिन का है।
1952 में शुक्र: राशि-दर-राशि अवधि
| राशि | से | तक | दिन |
|---|---|---|---|
| वृश्चिक | 1 जनवरी (पिछले वर्ष से) | मंगलवार, 22 जनवरी 1952 | 21 |
| धनु | मंगलवार, 22 जनवरी 1952 | शुक्रवार, 15 फ़रवरी 1952 | 25 |
| मकर | शुक्रवार, 15 फ़रवरी 1952 | मंगलवार, 11 मार्च 1952 | 24 |
| कुंभ | मंगलवार, 11 मार्च 1952 | शुक्रवार, 4 अप्रैल 1952 | 24 |
| मीन | शुक्रवार, 4 अप्रैल 1952 | मंगलवार, 29 अप्रैल 1952 | 24 |
| मेष | मंगलवार, 29 अप्रैल 1952 | शुक्रवार, 23 मई 1952 | 24 |
| वृषभ | शुक्रवार, 23 मई 1952 | सोमवार, 16 जून 1952 | 24 |
| मिथुन | सोमवार, 16 जून 1952 | शुक्रवार, 11 जुलाई 1952 | 24 |
| कर्क | शुक्रवार, 11 जुलाई 1952 | सोमवार, 4 अगस्त 1952 | 24 |
| सिंह | सोमवार, 4 अगस्त 1952 | शुक्रवार, 29 अगस्त 1952 | 24 |
| कन्या | शुक्रवार, 29 अगस्त 1952 | सोमवार, 22 सितंबर 1952 | 24 |
| तुला | सोमवार, 22 सितंबर 1952 | गुरुवार, 16 अक्टूबर 1952 | 24 |
| वृश्चिक | गुरुवार, 16 अक्टूबर 1952 | सोमवार, 10 नवंबर 1952 | 25 |
| धनु | सोमवार, 10 नवंबर 1952 | शुक्रवार, 5 दिसंबर 1952 | 25 |
| मकर | शुक्रवार, 5 दिसंबर 1952 | मंगलवार, 30 दिसंबर 1952 | 25 |
| कुंभ | मंगलवार, 30 दिसंबर 1952 | वर्ष के बाद भी जारी | 1 |
दिनों की गिनती कैलेंडर वर्ष के भीतर की है। वर्ष की सीमा पर चल रहे ठहराव पूरे वर्ष से लंबे हो सकते हैं।
शुक्र गोचर कैसे पढ़ें
शुक्र एक राशि में लगभग 23 से 30 दिन रहता है और राशिचक्र का चक्कर लगभग एक वर्ष में पूरा करता है। लगभग हर 19 महीने में उसका वक्री काल और सूर्य के निकट अस्त होना अलग से देखा जाता है।
शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, सुख-सुविधा और वाहन का कारक है। उसके गोचर से संबंध, विलासिता से जुड़ा धन और रचनात्मक कार्य देखे जाते हैं।
शुक्र चंद्र से पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, आठवें, नवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में सामान्यतः संबंध और धन के लिए अनुकूल माना जाता है, इसलिए नीचे की अधिकांश राशियों में कुछ सहयोग मिलता है।
शुक्र गोचर 1952 की ये तिथियाँ लाहिरी अयनांश और सत्य चंद्र पात से गणना हैं। दशा-गोचर व्याख्या के लिए व्यक्तिगत परामर्श लें।
ग्रह गोचर FAQ
वैदिक गोचर समय कैसे गणना होते हैं और इस तालिका को कैसे पढ़ें।
वैदिक ज्योतिष में ग्रह गोचर क्या है?
गोचर नवग्रह की सायन राशि चक्र में वर्तमान गति है। जब ग्रह नई राशि में प्रवेश करता है, वह स्थानीय तिथि-समय ही गोचर (प्रवेश) समय कहलाता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
सभी स्थितियाँ लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से हैं — वही प्रणाली जो दैनिक पंचांग में है — ताकि सूर्य और चंद्र राशि सभी टूल्स में एक जैसी रहें।
क्या शहर से ग्रह स्थिति बदलती है?
भूकेंद्रीय सायन रेखांश किसी UTC क्षण पर दुनिया भर में समान होते हैं। शहर केवल उस क्षण को स्थानीय घड़ी समय में बदलता है।
राहु-केतु मीन या सत्य पात?
हम राहु-केतु के लिए सत्य चंद्र पात उपयोग करते हैं। केतु सदैव राहु के विपरीत (180°) रहता है।
ये समय कितने सटीक हैं?
प्रवेश समय आधुनिक खगोलीय मॉडल से लगभग एक सेकंड तक परिष्कृत हैं। बाहरी ग्रह आमतौर पर प्रमुख पंचांगों से मिनटों में मेल खाते हैं; चंद्र और पात सॉफ्टवेयर के बीच थोड़ा भिन्न हो सकते हैं।