वार्षिक गोचर कैलेंडर

शुक्र गोचर 1900 | गोचर तिथियाँ

1900 में शुक्र के सटीक राशि प्रवेश और निकास समय। अध्ययन और योजना के लिए लाहिरी सायन गोचर।

1900 में शुक्र 12 बार राशि बदलता है, लगभग हर 30 दिन में। वर्ष की शुरुआत मकर में और अंत वृश्चिक में होता है।

सटीक समय नीचे की तालिका में है।

New Delhi · अयनांश (लाहिरी) · राहु/केतु: सत्य चंद्र पात

प्रवेशसमय
कुंभमकर से
मीनकुंभ से
मेषमीन से
वृषभमेष से
मिथुनवृषभ से
कर्कमिथुन से
मिथुनकर्क से · वक्री
कर्कमिथुन से
सिंहकर्क से
कन्यासिंह से
तुलाकन्या से
वृश्चिकतुला से

1900 में शुक्र का गोचर: मुख्य बातें

  • 1900 में शुक्र कुल 12 बार राशि बदलता है। पहला प्रवेश रविवार, 14 जनवरी 1900 को मकर से कुंभ में है, और अंतिम सोमवार, 17 दिसंबर 1900 को वृश्चिक में।
  • इस वर्ष सबसे लंबा ठहराव मिथुन राशि में लगभग 66 दिन का है।
  • सबसे छोटा पूरा ठहराव कर्क में लगभग 18 दिन का है।
  • 1 प्रवेश वक्री गति में होता है, यानी ग्रह पिछली राशि में लौटता है।

1900 में शुक्र: राशि-दर-राशि अवधि

राशिसेतकदिन
मकर1 जनवरी (पिछले वर्ष से)रविवार, 14 जनवरी 190013
कुंभरविवार, 14 जनवरी 1900बुधवार, 7 फ़रवरी 190024
मीनबुधवार, 7 फ़रवरी 1900रविवार, 4 मार्च 190025
मेषरविवार, 4 मार्च 1900शुक्रवार, 30 मार्च 190026
वृषभशुक्रवार, 30 मार्च 1900शुक्रवार, 27 अप्रैल 190028
मिथुनशुक्रवार, 27 अप्रैल 1900गुरुवार, 7 जून 190041
कर्कगुरुवार, 7 जून 1900सोमवार, 25 जून 190018
मिथुन (वक्री)सोमवार, 25 जून 1900शुक्रवार, 31 अगस्त 190066
कर्कशुक्रवार, 31 अगस्त 1900सोमवार, 1 अक्टूबर 190032
सिंहसोमवार, 1 अक्टूबर 1900रविवार, 28 अक्टूबर 190027
कन्यारविवार, 28 अक्टूबर 1900गुरुवार, 22 नवंबर 190025
तुलागुरुवार, 22 नवंबर 1900सोमवार, 17 दिसंबर 190025
वृश्चिकसोमवार, 17 दिसंबर 1900वर्ष के बाद भी जारी15

दिनों की गिनती कैलेंडर वर्ष के भीतर की है। वर्ष की सीमा पर चल रहे ठहराव पूरे वर्ष से लंबे हो सकते हैं।

शुक्र गोचर कैसे पढ़ें

शुक्र एक राशि में लगभग 23 से 30 दिन रहता है और राशिचक्र का चक्कर लगभग एक वर्ष में पूरा करता है। लगभग हर 19 महीने में उसका वक्री काल और सूर्य के निकट अस्त होना अलग से देखा जाता है।

शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, सुख-सुविधा और वाहन का कारक है। उसके गोचर से संबंध, विलासिता से जुड़ा धन और रचनात्मक कार्य देखे जाते हैं।

शुक्र चंद्र से पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, आठवें, नवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में सामान्यतः संबंध और धन के लिए अनुकूल माना जाता है, इसलिए नीचे की अधिकांश राशियों में कुछ सहयोग मिलता है।

शुक्र गोचर 1900 की ये तिथियाँ लाहिरी अयनांश और सत्य चंद्र पात से गणना हैं। दशा-गोचर व्याख्या के लिए व्यक्तिगत परामर्श लें।

ग्रह गोचर FAQ

वैदिक गोचर समय कैसे गणना होते हैं और इस तालिका को कैसे पढ़ें।

वैदिक ज्योतिष में ग्रह गोचर क्या है?

गोचर नवग्रह की सायन राशि चक्र में वर्तमान गति है। जब ग्रह नई राशि में प्रवेश करता है, वह स्थानीय तिथि-समय ही गोचर (प्रवेश) समय कहलाता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

सभी स्थितियाँ लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से हैं — वही प्रणाली जो दैनिक पंचांग में है — ताकि सूर्य और चंद्र राशि सभी टूल्स में एक जैसी रहें।

क्या शहर से ग्रह स्थिति बदलती है?

भूकेंद्रीय सायन रेखांश किसी UTC क्षण पर दुनिया भर में समान होते हैं। शहर केवल उस क्षण को स्थानीय घड़ी समय में बदलता है।

राहु-केतु मीन या सत्य पात?

हम राहु-केतु के लिए सत्य चंद्र पात उपयोग करते हैं। केतु सदैव राहु के विपरीत (180°) रहता है।

ये समय कितने सटीक हैं?

प्रवेश समय आधुनिक खगोलीय मॉडल से लगभग एक सेकंड तक परिष्कृत हैं। बाहरी ग्रह आमतौर पर प्रमुख पंचांगों से मिनटों में मेल खाते हैं; चंद्र और पात सॉफ्टवेयर के बीच थोड़ा भिन्न हो सकते हैं।

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